3 मई 2026 की नीट परीक्षा रद्द होने के बाद अब सभी की नजर 21 जून 2026 को होने वाले री-एग्जाम पर है। इस री-एग्जाम के साथ एक बड़ा सवाल भी उठा है, री-नीट 2026 कटऑफ पर इसका क्या असर पड़ेगा? नीट कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा? और री-नीट 2026 का रैंक पर क्या असर पड़ेगा?
यह सवाल उन सभी 22 लाख से अधिक छात्रों के लिए बेहद जरूरी है जो 21 जून को दोबारा परीक्षा देने वाले हैं।
री-नीट 2026 का एमबीबीएस कटऑफ पर प्रभाव: मूल बात
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एमबीबीएस कटऑफ 2026 दो तरह की होती है:
- योग्यता कटऑफ (Qualifying Cutoff): यह वह न्यूनतम अंक है जो एनटीए तय करता है और जिसे पार करने पर काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता मिलती है। सामान्य वर्ग के लिए 50वां पर्सेंटाइल यानी अपेक्षित 165 के आसपास अंक।
- प्रवेश कटऑफ (Admission Cutoff): यह वह अंक है जिस पर किसी विशेष कॉलेज की अंतिम सीट भरती है। सरकारी कॉलेज के लिए सामान्य वर्ग में यह 610 से 650+ तक हो सकती है।
री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव मुख्य रूप से प्रवेश कटऑफ पर पड़ता है, न कि योग्यता कटऑफ पर।
री-नीट 2026 के बाद कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?
यह प्रश्न जितना सरल लगता है, उत्तर उतना ही जटिल है। री-नीट 2026 के बाद कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा, इसके लिए कई कारणों का विश्लेषण करना होगा।
कटऑफ बढ़ने के कारण
- मई का पेपर रद्द, री-एग्जाम में छात्र अधिक तैयार होंगे मई 2026 में परीक्षा दे चुके छात्रों को अब 40 से 45 दिन और मिले हैं। इस अतिरिक्त समय में छात्र कमजोर विषयों पर काम कर सकते हैं। इससे औसत प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना है, जो नीट कटऑफ 2026 को ऊपर धकेल सकती है।
- प्रतिस्पर्धा वही रहेगी 22 लाख से अधिक पंजीकृत छात्र री-एग्जाम में भाग लेंगे। सीटों की संख्या नहीं बदलेगी। इसलिए प्रतिस्पर्धा का स्तर पहले जैसा ही रहेगा।
- पेपर कठिन हो सकता है विशेषज्ञों का अनुमान है कि री-एग्जाम में प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। लेकिन यदि पेपर कठिन रहा तो औसत अंक कम होंगे और कटऑफ नीचे जा सकता है।
कटऑफ घटने के कारण
- मनोवैज्ञानिक दबाव दूसरी बार परीक्षा देने में कुछ छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव होता है। कुछ छात्र री-एग्जाम छोड़ भी सकते हैं, जिससे कुल उपस्थिति घट सकती है।
- अनिश्चितता का माहौल पेपर लीक मामले के बाद पैदा हुई अनिश्चितता से कुछ छात्रों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।
नीट 2026 कटऑफ: श्रेणी-वार अपेक्षित स्तर
पिछले वर्षों के रुझान और विशेषज्ञ विश्लेषण के आधार पर री-नीट 2026 के बाद अपेक्षित कटऑफ इस प्रकार हो सकती है:
| श्रेणी | योग्यता कटऑफ (अपेक्षित) | सरकारी एमबीबीएस के लिए सुरक्षित अंक |
| सामान्य / EWS | 165 के आसपास | 610–650+ |
| OBC-NCL | 128–130 के आसपास | 590–620+ |
| अनुसूचित जाति | 128 के आसपास | 520–540+ |
| अनुसूचित जनजाति | 128 के आसपास | 490–510+ |
ये आंकड़े अनुमानित हैं। आधिकारिक कटऑफ रिजल्ट के साथ जारी होगी।
री-नीट 2026 का रैंक पर क्या असर पड़ेगा?
री-नीट 2026 का रैंक पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना काउंसलिंग की रणनीति बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
रैंक सीधे तौर पर तय होती है उस परीक्षा के कुल प्रदर्शन से जो 21 जून को होगी। मई 2026 के अंक किसी भी रूप में शामिल नहीं होंगे। री-नीट 2026 एमबीबीएस कटऑफ और रैंक पूरी तरह जून के री-एग्जाम पर आधारित होंगे।
रैंक को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण:
- औसत अंक: यदि अधिकांश छात्र बेहतर प्रदर्शन करें तो एक ही स्कोर पर रैंक पहले से खराब आ सकती है।
- पेपर का स्तर: कठिन पेपर में कम अंकों पर भी अच्छी रैंक आ सकती है।
- उपस्थिति: यदि कुछ छात्र री-एग्जाम न दें तो कुल प्रतिस्पर्धा घटेगी।
राज्य कोटा और एआईक्यू: कहां अधिक अवसर?
री-नीट 2026 एमबीबीएस कटऑफ के संदर्भ में एआईक्यू और राज्य कोटे में बड़ा अंतर होता है।
राज्य कोटे की कटऑफ एआईक्यू से लगभग 50 से 60 अंक कम रहती है। इसलिए जो छात्र एआईक्यू में शीर्ष कॉलेजों से चूक जाते हैं, उनके लिए राज्य कोटा एक मजबूत विकल्प होता है। राज्य कोटे में प्रवेश अखिल भारतीय रैंक के बजाय राज्य रैंक पर निर्भर करता है।
छात्रों के लिए सुझाव: री-नीट एग्जाम में क्या करें?
री-नीट 2026 के बाद MBBS कटऑफ कितना जाएगा इसका सटीक अनुमान कोई नहीं लगा सकता। लेकिन स्मार्ट रणनीति यह है:
- 610 से अधिक का लक्ष्य रखें, यह सामान्य वर्ग के लिए सरकारी सीट की उचित उम्मीद देता है।
- 650 से अधिक पाने पर एआईक्यू में शीर्ष कॉलेजों में दावेदारी मजबूत होती है।
- जीव विज्ञान में अधिकतम अंक लाने पर ध्यान दें, यह 360 अंकों का विषय है।
- काउंसलिंग में केवल सपनों के कॉलेज नहीं, अपनी रैंक के अनुसार विकल्पों की सूची तैयार करें।
- कटऑफ को लेकर अफवाहों पर ध्यान न दें, आधिकारिक जानकारी neet.nta.nic.in पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. री-नीट 2026 के बाद कटऑफ बढ़ेगा या घटेगा?
यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है। यदि री-एग्जाम का प्रश्नपत्र कठिन रहा तो नीट 2026 कटऑफ नीचे जा सकता है। यदि छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा तो यह बढ़ सकता है। री-नीट 2026 का कटऑफ पर प्रभाव पेपर के स्तर, उपस्थित छात्रों की संख्या और उनके औसत प्रदर्शन, इन तीन कारणों पर निर्भर है।
Q2. री-नीट 2026 में कितने अंक पर सरकारी एमबीबीएस मिल सकता है?
विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए एमबीबीएस कटऑफ 2026 में एआईक्यू के तहत सरकारी कॉलेज के लिए 610 से 650+ अंक आवश्यक हो सकते हैं। ओबीसी के लिए 590 से 620+, अनुसूचित जाति के लिए 520 से 540+ और अनुसूचित जनजाति के लिए 490 से 510+ अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं। राज्य कोटे में यह सीमा 50 से 60 अंक कम रहती है।
Q3. क्या मई 2026 के नीट के अंक री-एग्जाम रैंक में जोड़े जाएंगे?
नहीं। री-नीट 2026 का रैंक पर क्या असर पड़ेगा इस संदर्भ में एनटीए ने स्पष्ट किया है कि 21 जून की री-एग्जाम के अंक ही मान्य होंगे। 3 मई का रद्द किया गया प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से रैंक में शामिल नहीं किया जाएगा। अंतिम मेधा सूची पूरी तरह री-एग्जाम के प्रदर्शन पर आधारित होगी।








