हर साल देशभर के हजारों छात्र NEET-UG देते हैं ताकि वे डॉक्टर बनने की दिशा में पहला कदम उठा सकें। लेकिन किस अंक से असली फर्क पड़ता है? दो अलग मानदंड होते हैं। पहला वह स्कोर है जिसे परीक्षा प्राधिकरण “क्वालिफाइंग मार्क” कहते हैं। दूसरा वह स्कोर है जो आपको वास्तव में MBBS सीट के लिए प्रतिस्पर्धी बनाता है, खासकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए। यहां हम 2025 और 2026 के अनुमानित डेटा के आधार पर दोनों को स्पष्ट रूप से समझते हैं।
NEET परीक्षा और क्वालिफाइंग मार्क्स को समझना
NEET-UG कुल 720 अंकों की परीक्षा है। इसमें तीन खंड होते हैं — फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी। इनके अधिकतम अंक क्रमशः 180, 180 और 360 होते हैं। हर सही उत्तर पर +4 अंक मिलते हैं और गलत उत्तर पर 1 अंक की कटौती होती है। हर वर्ष पासिंग या क्वालिफाइंग मार्क श्रेणी-वार परसेंटाइल के आधार पर तय किए जाते हैं। 2026 के लिए अनुमानित क्वालिफाइंग स्कोर इस प्रकार हैं:
| श्रेणी | क्वालिफाइंग परसेंटाइल | अनुमानित पासिंग मार्क्स (720 में से) |
| UR / EWS | 50वां | 686 – 144 |
| OBC | 40वां | 129 – 143 |
| SC / ST | 40वां | 129 – 142 |
| UR / EWS – PwD | 45वां | 129 – 143 |
| OBC / SC / ST – PwD | 40वां | लगभग 128 – 129 |
यदि आपका स्कोर इन सीमाओं को प्राप्त करता है, तो आप काउंसलिंग के लिए पात्र माने जाते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आपको सीट मिल ही जाएगी, खासकर यदि आपका लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज है।
पासिंग मार्क्स ≠ एडमिशन मार्क्स क्यों
NEET क्वालिफाई करना केवल काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति देता है। लेकिन मेडिकल सीटें सीमित हैं और लगभग 1.1 से 1.2 लाख MBBS सीटें ही पूरे देश में उपलब्ध हैं। मांग ज्यादा होने और राज्य-वार कोटा नियमों के कारण सरकारी कॉलेजों में प्रवेश के लिए वास्तविक आवश्यकता क्वालिफाइंग मार्क से कहीं अधिक होती है। इसलिए लक्ष्य सिर्फ “पास” नहीं होना चाहिए बल्कि उससे कहीं अधिक अंक लाना जरूरी है।
हाल के ट्रेन्ड्स (2025 → 2026)
पिछले वर्षों के आधार पर, सामान्य (UR) श्रेणी के छात्रों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का सुरक्षित क्षेत्र आम तौर पर 600 अंकों के आसपास माना जाता है। कुछ मुख्य बातें:
- सामान्य श्रेणी का क्वालिफाइंग मार्क 2025 में लगभग 144 था।
- लेकिन सरकारी MBBS सीट पाने के लिए सामान्यत: 600+ अंक की आवश्यकता पाई गई है।
- 500–550 की रेंज में कुछ राज्य सरकारी कॉलेजों और आरक्षित श्रेणियों में संभावनाएं मिल सकती हैं।
- परीक्षा की कठिनाई और प्रतिस्पर्धा के आधार पर ये आंकड़े वर्ष-दर-वर्ष बदल सकते हैं।
इन रुझानों को समझना पिछली साल की कट-ऑफ तुलना को स्पष्ट रूप से दिखाता है और 2026 की तैयारी के लिए बेहतर दृष्टिकोण देता है।
प्रमुख राज्यों में अनुमानित कट-ऑफ रेंज (UR / General)
| राज्य | लगभग स्कोर रेंज |
| यूपी | 585 – 630 |
| महाराष्ट्र | 605 – 620 |
| पश्चिम बंगाल | 600 – 615 |
| राजस्थान | 615 – 630 |
| तमिलनाडु | 590 – 605 |
| बिहार | 610 – 630 |
| गुजरात | 600 – 620 |
| केरल | 640 – 660 |
| कर्नाटक | 645 – 665 |
| आंध्र प्रदेश | 610 – 630 |
यह डेटा बताता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए न्यूनतम अंक आमतौर पर काफी अधिक होते हैं, खासकर उच्च प्रतिस्पर्धा वाले राज्यों में।
NEET 2026 के उम्मीदवारों के लिए इसका क्या अर्थ है
यदि आप NEET 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो आपका लक्ष्य केवल पासिंग मार्क न होना चाहिए। प्रवेश की वास्तविक संभावनाओं के आधार पर यह लक्ष्य इस प्रकार होना चाहिए:
- General / UR: 600 या उससे अधिक अंक आपके अवसरों को मजबूत करते हैं।
- OBC / SC / ST / Reserved: लगभग 500–550 अंक राज्य-वार कट-ऑफ और सीटों के आधार पर संभावनाएं बना सकते हैं।
यह अंतर श्रेणी-वार कट-ऑफ को समझने में मदद करता है और दर्शाता है कि OBC/SC/ST/General के लिए अलग-अलग cutoff क्यों होता है।
अंक हर साल क्यों बदलते हैं
कई कारण NEET कट-ऑफ को प्रभावित करते हैं:
- परीक्षा का कठिनाई स्तर
- राज्य-वार उम्मीदवारों की संख्या
- कुल MBBS सीटें
- श्रेणी और आरक्षण नियम
इन सबके कारण “सुरक्षित अंक सीमा” हर वर्ष बदल सकती है।
छात्रों के लिए व्यावहारिक सुझाव
अगर मैं NEET 2026 की तैयारी कर रहे किसी दोस्त को सलाह दूं, तो मैं कहूंगा:
- क्वालिफाइंग मार्क को केवल पहला पड़ाव मानें।
- सामान्य श्रेणी में 600+ और आरक्षित श्रेणी में 500+ का लक्ष्य रखें।
- अपने राज्य के पिछले कट-ऑफ का अध्ययन करें।
- सभी विषयों पर समान ध्यान दें क्योंकि हर साल प्रतिस्पर्धा बदलती है।
चिकित्सा के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश के इच्छुक छात्रों के लिए AIIMS, JIPMER और Top Medical Colleges के लिए Marks हमेशा सामान्य सरकारी कॉलेजों से अधिक होते हैं, इसलिए तैयारी उसी अनुसार रखें।
निष्कर्ष
MBBS प्रवेश 2026 के लिए केवल क्वालिफाइंग मार्क्स पर्याप्त नहीं होते। असली प्रतिस्पर्धा सरकारी कॉलेजों की कट-ऑफ में दिखाई देती है, जहां सामान्य श्रेणी के छात्रों को उच्च स्कोर की आवश्यकता पड़ती है। बेहतर लक्ष्य-निर्धारण, निरंतर अभ्यास और राज्य-वार रुझानों पर नजर सफलता की संभावना को मजबूत करते हैं। सही रणनीति रखने से आप वह स्कोर प्राप्त कर सकते हैं जो आपको बाकी उम्मीदवारों से आगे ले जाए।
FAQs
नीट-2026 में पास होने के लिए न्यूनतम अंक कितने चाहिए?
सामान्य वर्ग (UR/EWS) श्रेणी के लिए पासिंग मार्क लगभग 144 होने की उम्मीद है। आरक्षित श्रेणियों (OBC/SC/ST) के लिए यह लगभग 129–143 की रेंज में रह सकता है।
क्या NEET क्वालिफाई करने से MBBS सीट मिल जाती है?
नहीं। क्वालिफाई करना केवल काउंसलिंग के लिए पात्र बनाता है। प्रवेश सीटों की उपलब्धता, श्रेणी और राज्य-वार प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करता है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए कितने अंक होने चाहिए?
सामान्य श्रेणी में 600+ एक अच्छा लक्ष्य है। आरक्षित श्रेणी में 500–550 के आसपास अवसर मिल सकते हैं, लेकिन यह राज्य-वार बदलता है।
कट-ऑफ हर साल क्यों बदलती है?
कट-ऑफ परीक्षा की कठिनाई, उम्मीदवारों की संख्या, सीटों की उपलब्धता और श्रेणी नियमों के कारण बदलती रहती है।









