कई बार सही पढ़ाई के बावजूद अंक सिर्फ इसलिए गिर जाते हैं क्योंकि गलत सवालों में हाथ डाल दिया जाता है।
सच्चाई यह है कि जेईई मेन में रैंक सिर्फ सही सवाल करने से नहीं बनती,
बल्कि गलत सवाल न करने से भी बनती है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे:
- जेईई मेन में नेगेटिव मार्किंग क्या है
- इसका पैटर्न क्या है
- और सबसे ज़रूरी, इससे बचने की स्मार्ट रणनीति क्या होनी चाहिए
जेईई मेन 2026 में नेगेटिव मार्किंग का नियम
एनटीए ने आधिकारिक वेबसाइट पर जेईई मेन 2026 का परीक्षा पैटर्न जारी किया है। उसके अनुसार पेपर का स्ट्रक्चर और नेगेटिव मार्किंग स्कीम पूरी तरह स्पष्ट है।
जेईई मेन 2026 का बेसिक पैटर्न
- कुल प्रश्न: 75
- विषय:
- फिजिक्स – 25
- केमिस्ट्री – 25
- मैथ्स – 25
- कुल अंक: 300
- JEE Main Exam Pattern 2026, Marking Scheme & Total Questions Explained
जेईई मेन 2026 की मार्किंग स्कीम
नेगेटिव मार्किंग को समझना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यहीं से ज़्यादातर छात्र अंक खोते हैं।
- सही उत्तर: +4 अंक
- गलत उत्तर (एमसीक्यू): -1 अंक
- छोड़ा हुआ सवाल: 0 अंक
- न्यूमेरिकल टाइप सवाल:
- नेगेटिव मार्किंग एनटीए के निर्देशों पर निर्भर करती है
मतलब साफ है: एक गलत सवाल, एक पूरे सही सवाल की कमाई बिगाड़ सकता है।
नेगेटिव मार्किंग क्यों ज़्यादा नुकसान करती है?
कई छात्र सोचते हैं: “एक सवाल गलत हो गया तो क्या फर्क पड़ेगा?”
यहीं सबसे बड़ी गलती होती है।
उदाहरण समझिए:
- 10 सही सवाल = +40 अंक
- 5 गलत सवाल = -5 अंक
आपने मेहनत से 40 कमाए, लेकिन जल्दबाज़ी में 5 खुद ही काट दिए।
जेईई मेन जैसे कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम में 5 अंक आपकी हज़ारों रैंक गिरा सकते हैं।
जेईई मेन में नेगेटिव मार्किंग से बचने की रणनीति
अब आते हैं सबसे ज़रूरी हिस्से पर।
1. सवाल ध्यान से पढ़ना आदत बनाइए
कई नेगेटिव मार्क्स:
- गलत कॉन्सेप्ट से नहीं
- बल्कि सवाल गलत पढ़ने से लगते हैं
ध्यान रखें:
- “नहीं है”, “गलत है”, “सही नहीं है” जैसे शब्द
- यूनिट्स
- डायग्राम की दिशा
जल्दी पढ़ना ≠ स्मार्ट पढ़ना
2. एलिमिनेशन ट्रिक का सही इस्तेमाल करें
अगर चार ऑप्शन दिए हों:
- पहले साफ़ तौर पर गलत ऑप्शन हटाइए
- फिर बचे हुए ऑप्शन में लॉजिक लगाइए
लेकिन याद रखें:
- एलिमिनेशन तभी करें जब कम से कम एक ऑप्शन पक्का गलत हो
- बिना आधार के अनुमान न लगाएं
यह तरीका अंदाज़ा लगाने और बेवकूफी करने के बीच की लाइन है।
3. ब्लाइंड गेसिंग से पूरी तरह बचें
जेईई मेन में:
- ब्लाइंड गेसिंग = नेगेटिव मार्किंग का सबसे बड़ा कारण
अगर:
- सवाल समझ नहीं आया
- कोई ऑप्शन एलिमिनेट नहीं कर पा रहे
तो सवाल छोड़ देना समझदारी है, कमजोरी नहीं।
याद रखें:
छोड़ा हुआ सवाल कुछ नहीं बिगाड़ता।
गलत सवाल सब बिगाड़ देता है।
4. पहले पक्के सवाल करें
पेपर शुरू होते ही:
- सबसे पहले वही सवाल करें जो आपको आते हैं
- इससे दो फायदे होते हैं:
- अंक जल्दी जुड़ते हैं
- आत्मविश्वास बना रहता है
घबराहट में सीधे कठिन सवालों पर कूदना, नेगेटिव मार्किंग को न्योता देना है।
5. आख़िर में जल्दी करने से बचें
अक्सर देखा गया है:
- आख़िरी 10 मिनट में छात्र अंधाधुंध टिक मारते हैं
- यहीं सबसे ज़्यादा गलतियाँ होती हैं
बेहतर तरीका:
- आख़िरी 5 मिनट सिर्फ रिविज़न के लिए रखें
- यूनिट्स, साइन, वैल्यू दोबारा चेक करें
पेपर पूरा करना ज़रूरी नहीं, पेपर सही करना ज़रूरी है।
6. फिजिक्स और मैथ्स में ओवरथिंकिंग न करें
फिजिक्स और मैथ्स में:
- ओवरथिंकिंग सबसे बड़ा दुश्मन है
अगर:
- कैलकुलेशन बहुत लंबी लग रही है
- कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं बैठ रहा
तो सवाल छोड़ना बेहतर है।
90+ परसेंटाइल वाले छात्र:
हर सवाल नहीं करते, वे सही सवाल करते हैं।
7. केमिस्ट्री (Chemistry) में एनसीईआरटी पर भरोसा रखें
केमिस्ट्री में:
- ज़्यादातर सवाल सीधे एनसीईआरटी से होते हैं
- खासकर इनऑर्गेनिक और फिजिकल केमिस्ट्री में
अगर एनसीईआरटी अच्छे से पढ़ी है:
- तो आत्मविश्वास से जवाब दें
- लेकिन अगर याद नहीं आ रहा, तो अंदाज़ा न लगाएं
8. मॉक टेस्ट को असली परीक्षा की तरह दें
मॉक टेस्ट का असली फायदा:
- यह बताता है कि आप कहाँ गलती करते हैं
- और कितनी बार नेगेटिव मार्किंग में फँसते हैं
हर मॉक के बाद:
- गलत सवालों को तीन कैटेगरी में बाँटें:
- कॉन्सेप्ट एरर
- सिली मिस्टेक
- टाइम प्रेशर
फिर एक-एक कैटेगरी पर काम करें।
9. मार्किंग स्कीम दिमाग में फिक्स रखें
हर सवाल करते समय खुद से पूछें:
- क्या यह सवाल +4 दिलाएगा?
- या -1 का रिस्क है?
यह सोच आपको:
- बेकार के प्रयास से रोकेगी
- और स्मार्ट डिसीजन लेना सिखाएगी
जेईई मेन में नेगेटिव मार्किंग से जुड़ी आम गलतियाँ
- “एक सवाल और कर ही लेते हैं”
- “शायद सही हो जाए”
- “सब कर लेते हैं, बाद में देखेंगे”
यही सोच:
- अंक काटती है
- रैंक गिराती है
निष्कर्ष
जेईई मेन में नेगेटिव मार्किंग कोई दुश्मन नहीं है। दुश्मन है बिना सोचे किया गया प्रयास।
अगर आप:
- सवाल ध्यान से पढ़ते हैं
- ब्लाइंड गेसिंग से बचते हैं
- मॉक टेस्ट का सही एनालिसिस करते हैं
तो नेगेटिव मार्किंग अपने आप कंट्रोल में आ जाती है।
याद रखें:
जेईई मेन में सफलता का मतलब यह नहीं है कि हर सवाल हल किया जाए।
असल सफलता सही सवालों को सही तरीके से हल करने और गलत या कठिन सवालों को छोड़ देने में है।
क्या जेईई मेन 2026 में नेगेटिव मार्किंग है?
हाँ। हर गलत एमसीक्यू पर 1 अंक कटता है।
छोड़े गए सवाल पर कितने अंक कटते हैं?
कोई अंक नहीं कटता।
क्या न्यूमेरिकल सवाल में नेगेटिव मार्किंग होती है?
यह एनटीए के निर्देशों पर निर्भर करता है।
नेगेटिव मार्किंग से बचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
ब्लाइंड गेसिंग से बचना और पक्के सवाल पहले करना।










