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NCERT Class 8 Hindi Solutions: विद्यार्थियों को हिंदी की सभी विधाओं का सम्पूर्ण ज्ञान हो इस बात को बख़ूबी समझते हुए कक्षा 8 के हिंदी पाठ्यक्रम को बनाया है इसको पढ़ने से छात्रों को कहानी,निबन्ध, कविता और भारत की प्राचीन संस्कृति सभ्यता आदि का ज्ञान प्राप्त होगा।

यदि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम को समझने में दिक्कत आये तो उसके लिए आकाश संस्थान द्वारा बनाया गया कक्षा 8 हिंदी एन.सी.इ.आर.टी (NCERT) हल  इस समस्या में उनकी सहायता करेगा। प्रश्नों के हल का यह संग्रह आकाश संस्थान के अनुभवी शिक्षकों द्वारा किया गया है तथा इसकी भाषा बेहद सरल रखी गयी है।    

NCERT कक्षा 8 हिंदी पाठ्यपुस्तक "वसंत"

पाठ 1:  ध्वनि

प्रस्तुत कविता – ध्वनि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी ने लिखी है। कवि विश्वास रखते है की उनका कभी अंत नहीं होगा। इस कविता के द्वारा उन्होंने प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदना को समझाया है। वे कह रहे है की अभी तो उनके वसंत रूपी जीवन में यौवन आया है। हर तरफ हरियाली है और कलियां खिली है। वे सूरज को आ कर उन कलियों को जगाएंगे कविता में वे प्रकृति के द्वारा निराश लोगों के जीवन को खुशियों से भर देना चाहते है अर्थात वे अपने नवीन जीवन के अमृत से हर मनुष्य का जीवन सुखद कर देना चाहते है।

पाठ 2: लाख की चूड़ियाँ

लेखक कामतानाथ द्वारा रचित यह कहानी शहरों में बढ़ रहे औद्योगिकरण से गांव के उद्योग खत्म होने का एक दुखद वर्णन है। कहानी एक बच्चे और बदलू मामा की है। लेखक गर्मियों की छुट्टी में अपने मामा के घर जाते थे। उनके मामा बहुत सुंदर लाख की चूड़ियां बनाते थे। गांव में और आस पास के गांव की  स्त्रियां उनसे चूड़ियां लेती थी। लेखक कुछ सालों बाद जब गांव वापिस गए तो सबको कांच की चूड़ियां पहनी देख हैरान हो गए। केसे शांति और प्यार के वातावरण से बसे गांव में परिस्थितियां बदलती है। और कैसे बदलू विपरीत हालात में भी अपने उसूल नहीं त्यागता।

पाठ 3: बस की यात्रा

बस की यात्रा हरिशंकर परसाई का एक व्यंग्यात्मक यात्रा उल्लेख है। वे इस लेख से अपने व्यक्तिगत अनुभव बताते है जो एक – बस की यात्रा है। उन्होंने अपने बस से पन्ना जाने के सफर को इस पाठ में दर्शाया है। इस सफर में क्या–क्या अनुभव किया, क्या–क्या घटना घटी और परिवहन निगम की बस पर व्यंग किया है। बस बहुत पुरानी थी, इंजन शुरू होने पर ऐसा लग रहा था मानो सीट के नीचे ही इंजन हो। कुछ दूर जाकर पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया, फिर कुछ आगे जा कर पुलिया पर बस का टायर फट गया। अब तक परेशान यात्री पन्ना समय से पहुंच जाने की उम्मीद छोड़ चुके थे और हंसी– मज़ाक में शामिल हो गए।

पाठ 4 – दीवानों की हस्ती

भगवतीचरण वर्मा जी की कविता – दीवानों की हस्ती में कवि ने दीवानों के जीवन पर प्रकाश डाला है। वे मानते है की समाज में चाहे लोग कुछ भी कहे लेकिन दीवानों का कार्य प्रासंगिक है। वे जगत में खुशी और उल्लास फैलाते है। कवि कभी भी एक जगह ज़्यादा वक्त तक नहीं रह पाते। वे तो संसार को कुछ मीठी–प्यारी यादें और अनुभव दे कर फिर से अपने सफर की और निकल जाते है। कवि दुःख और सुख दोनों को एक समान रूप से स्वीकारते है और यही उसके सदा प्रसन्न रहने का प्रमुख कारण है। कवि हमें अपनी सफलता और असफलता का श्रेय स्वयं को देने का संदेश देते है।

पाठ 5 – चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया अरविंद कुमार सिंह जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध निबंध है। लेखक ने इस निबंध में पत्रों की अहमियत और उनकी उपयोगिताओं पर प्रकाश डाला है। लेखक के अनुसार जो काम पत्र करते है वो काम आज के ज़माने के फ़ोन नहीं कर सकते। उन्होंने मानव सभ्यता के विकास में पत्रों की महत्ता बताई है। लेखक के अनुसार पत्र सिर्फ संदेश के संचार का माध्यम ही नहीं है अपितु मार्गदर्शन की भूमिका भी निभाते है। मोबाइल में आए संदेश लोग मिटा देते है पर पत्र संभाल कर रखे जाते है। हमारे देश और संस्कृति में पत्र की भूमिका पुरानी है। पत्र आम लोगों को जोड़ने का कार्य करते है।

पाठ 6– भगवान के डाकिए

भगवान के डाकिए कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखी है। कविता के माध्यम से वे पाठकों को प्राकृतिक उत्पादनों के द्वारा प्रेम, समानता, एकता तथा भाई चारे का संदेश दे रहे है। वे पंछी और बादल को भगवान के डाकिया मान रहे है जो भगवान का संदेश सुनते है। कवि कहते है की पर्वत, पेड़–पौधे और पानी आदि को इनकी चिट्ठियां समझते है। कवि के अनुसार हम मनुष्य छोटे किस्म के प्राणी है। हम अपनी सीमाओं में रहकर काम करते है। वहीं पक्षी इस धरती पर खिले फूलों की खुशबू एक देश से दूसरे देश ले जाते और  है हम इंसानों की तरह बादल एक सीमा में नहीं रहते।

पाठ 7क्या निराश हुआ जाए हजारी

क्या निराश हुआ जाए हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित एक निबंध है। लेखक इसमें हमारे देश में आ रही सामाजिक बुराइयों से साथ उसकी अच्छाइयों को भी उजागर करने का संदेश दे रहे है। वे कहते है की बुराइयों का रस लेना बुरी बात है ।लेखक के अनुसार समाचार पत्र आदमी को आदमी पर विश्वाश करने से रोकता है। वे कहते है की भारतीय सदा संतुष्ट रहे है। भारत में कानून को धर्म माना गया है परंतु आज भी लोगों में ईमानदारी और सच्चाई है। लेखक यह सोच के प्रसन्न है की आज भी लोगों में उदारता बाकी है और इसी के साथ उनके मन में आशा की किरण जगती है।

पाठ 8यह सबसे कठिन समय नहीं

यह सबसे कठिन समय नहीं – जाया जदवानी जी द्वारा लिखी कविता है। वे कविता के माध्यम से मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में हार न मानने की प्रेरणा देती है। वे लिखते है की चिड़िया अपना घोंसला बनाने के लिए एक तिनका इकट्ठा करती है गिरते हुए पत्तों को पकड़ने वाले हाथ अभी भी है, रेल्वे स्टेशनो पर लोगों को अपनी मंजिलों तक पहुंचाने वाली रेलगाड़ी अभी भी तैयार है। सूर्यास्त होने पर लोग अपने परिजनों का इंतजार करते है। दादी–नानी अभी भी बच्चों को कहानियाँ सुना रही है। अभी संसार गतिशील है अतः अभी सबसे कठिन समय नहीं आया है।

पाठ 9 कबीर की साखियॉं

इस साखियों में कवि कबीरदास जी हमे सज्जन पुरुष को उसके ज्ञान के आधार पर परखने का संदेश दे रहे है। वे हम इंसान की परख उसके बाहरी रूप से न कर उसके अंदरूनी गुणों और खूबसूरती को देख कर करने को कहते है। कबीरदास जी किसी को बड़ा या छोटा ना समझने की सिख दे रहे है। कई बार छोटी चीजें भी बहुत ताकतवर होती है। जिन्हें हम छोटा समझते है कई बार आगे जाकर वो हमारे बड़े दुखों का कारण होती है। अगर हमारे मन में शांति है तो हमारा कोई भी दुश्मन नहीं हैं। अहंकार छोड देने पर दयाभाव आ जाता है।

पाठ 10 कामचोर’

कामचोर’ इस्मत चुगताई जी द्वारा लिखी एक श्रेष्ठ कहानी है। कहानी में उन्होंने कामचोरी से किए गए कार्य और उसने दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला है। लेखिका ने कामचोरी के असल रूप को लोगों के सामने प्रस्तुत किया है। पाठ हमें हर काम को सूझ–भूज से करने की शिक्षा देता है। बच्चों को समय रहते काम करने के लिए उत्साहित करते रहना चाहिए नहीं तो वे आलसी हो जाते है। यह एक संयुक्त परिवार की कहानी है। बच्चों की देखभाल के लिए कई नौकर है जो हर वस्तु उन्हें हाथ में देते है। सारे बच्चे आलसी हो जाते है और काम मिलने पर घर में भूकंप जैसी स्थिति बना देते है।

पाठ 11 – जब सिनेमा ने बोलना सीखा

जब सिनेमा ने बोलना सीखा एक अद्भुत अध्याय है। इसके रचिता प्रदीप तिवारी जी है। इस लेख के द्वारा लेखक ने सिनेमा जगत में आए बदलाव को उजागर करने की कोशिश की है। कैसे सिनेमा के शुरूआती दिनों में मूक फिल्में बनती थी और कैसे इसमें समय के साथ कई और बहुत बड़े परिवर्तन के साथ सिनेमा ने बोलना सीखा। समय के साथ सिनेमा ने एक महत्व उपलब्धि प्राप्त की, यह सिनेमा की पहली बोलती फ़िल्म आलम आरा थी। इस फ़िल्म के आने के आठ सप्ताह तक यह हाउसफुल रही। इसके बाद केसे फिल्म जगत ने नई राह पकड़ी और नई ऊंचाइयों को छू लिया।

पाठ 12 सूरदास चरित

सूरदास चरित में महाकवि सूरदास जी के दो पद दिए गए है। ये पद भगवान श्री कृष्ण को और उनकी बाल लीलाओं को समर्पित है। जब यशोदा मां कान्हा को दूध पिलाने के लिए यह के देती है की दूध पीने से उनकी चोटी बलराम जैसी बड़ी और मोटी हो जाएगी। जब कान्हा दूध पी लेते है और अपनी चोटी छोटी पाते है तो वे मां यशोदा से पूछने लगते है। दूसरे पद में सूरदास जी श्री कृष्ण की माखन चोरी के बारे में लिख रहे है। केसे कान्हा अपने मित्रों के संग मिलकर गोपियों के  घर से माखन चुरा कर खा जाते थे। इस पद में गोपियां मां यशोदा से इस बात की शिकायत करने आई है।

पाठ 13 जहाँ पहिया है

इस पाठ के लेखक पी साईनाथ है इसमें लेखक ने तमिलनाडु की महिला के जीवन संघर्ष बताया है। पाठ में बताया है की कैसे महिलाएं अपने घरों और समाज की सोच से बाहर निकल आत्मनिर्भर बनती है। पाठ में लेखक ने समाज में हो रहे परिवर्तन और महिलाओं की आज़ादी का उदहारण लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया है। केसे सत्तर हज़ार महिलाओं ने प्रदर्शन और प्रतियोगिताओं जैसे सार्वजनिक कार्यों में हर्षोल्लास से हिस्सा ले कर अपने कौशल का प्रदर्शन किया। साइकिल चलने की इच्छा होने के कारण कई परीक्षण शिविर भी चलें। इस गांव की महिलाएं संयुक्त रूप से बिना किसी भेद भाव के साइकिल चलती थी ।

पाठ 14 अकबरी लोटा

अकबरी लोटा अन्नापूर्णानंद वर्मा की एक रोचक और हास्यपद कहानी है। कहानी एक दोस्त की और कैसे वह अपनी सच्ची मित्रता निभाने का प्रयास करता है। पाठ के मुख्य किरदार लाला झाऊलाला है। एक बार उनकी पत्नी ने कुछ पैसे मांगे तो उन्होंने एक सप्ताह में देने का वादा किया। चार दिन बाद कुछ न होने पर उन्होंने यह परेशानी अपने मित्र को बताई। दो दिनों बाद लाल जी परेशान को कर छत पर पानी पी रहे थे और  अचानक उनके साथ से पानी का लोटा नीचे गिर गया और एक अंग्रेज को लग गया। उनके मित्र ने उस अधिकारी को कुर्सी पर बिठाया और उस लोटे को ऐतिहासिक बता कर उसे बेच दिया।

पाठ 15 – सुर के पद

सुर के पद में महाकवि सूरदास जी श्रीकृष्ण के बाल रूप और मां यशोदा के पुत्र प्रेम पर तीन पद लिखे है। पहल पद में माता यशोदा श्री कृष्ण को सुला रही है। माता श्री कृष्ण को पालने में रखकर कभी हिला रही है तो कभी उन्हें लोरियाँ सुना रही है। दूसरे पद में श्री कृष्ण जब घुटनों के बल चलते है तो उनके पायलों से आवाज आती है जो अत्यंत मोहक है। तीसरे पद में श्री कृष्ण चंद्रमा को पाने की ज़िद करते है और कहते है की वो तब तक ना कुछ खाए पायेंगे, ना कोई आभूषण पहने ही। मां यशोदा उन्हें बहलाने की कोशिश करती है।

पाठ 16 पानी की कहानी

पानी की कहानी लेखक रामचंद्र तिवारी द्वारा लिखा निबंध है। इस लेख में लेखक ने ओस की बूंद के माध्यम से पानी का रूप समझाया है और बताया है की उसकी रचना किस प्रकार होती है। इसमें पानी के जीवन का चक्र को समझाया गया है। केसे समुद्र का पानी सूर्य की गरम किरणों से भाप बन जाता है। फिर भाप आसमान में काफ़ी ऊंचाई पर जा कर बादल का रूप ले लेती है। यहीं बादल जब हमारे ग्रह पर बरसात के रूप बरसते है तब कुछ पानी हमारी धरती में रिस जाता है, कुछ नदी–नालों में बह जाता है। नदियों से पानी फिर समुद्र में चला जाता है। इसी प्रकार यह चक्र चलता है।

पाठ 17 बाज और साँप

निर्मला वर्मा की कहानी–  बाज और  साँप  एक बोध कथा है। इसमें दो अलग प्राणियों की अलग–अलग विचारधाराओं और उनके संसार को देखने के नजरिए का वर्णन है। कथा में सांप समुद्र किनारे एक गुफा में रहता है। एक दिन एक घायल बाज़ सांप की गुफा में आ गिरा। बाज़ ने सांप से कहा की उसके जीवन की आखिरी घड़ियां आ गई है। सारा जीवन उसने आसमान की उचाइयां अपने पंखों से नापी है। बाज़ एक बार और उड़ना चाहता था। बाज़ द्वारा आकाश में उड़ने के लिए आखिरी प्रयास और अपने प्राणों का बलिदान देना सांप को प्रेरित करता है।

पाठ 18 – टोपी

यह एक लोक कहानी है इसके लेखक संजय जी है। कहानी में लेखक ने सामाजिक समस्याओं और एक नन्ही गौरैया के दृढ़ संकल्प और प्रयास को बताया है। गौरैया को मनुष्य को देख कर टोपी पहनने का शौक चढ़ जाता है । उसने अपने लिए एक सुंदर टोपी बनाने की ठान ली। वह रुई ढूंढ कर मेहनत से उसकी टोपी बनवाती है। टोपी पहनकर उसे राजा से मिलने का मन होता है। राजा को उसकी टोपी देख आश्चर्य हुआ। राजा उसकी टोपी लेने लगा तो वो जोर-जोर से चिल्ला कर राजा की पोल खोलने लगी। डर से राजा ने उसे उसकी टोपी वापस कर दी।

NCERT कक्षा 8 हिंदी पाठ्यपुस्तक "दूर्वा"

पाठ 1- गुड़िया

कुंवर नारायण द्वारा रचित इस कविता में खिलौनों के लिए एक बच्चे का स्नेह और उसकी भावना को दर्शाया गया है। कवि ने बताया है की केसे बच्चा मेले से लाई हुई गुड़िया की सुंदरता से प्रभावित है और केसे गुड़िया ने उसका मन जीता है। गुड़िया स्वयं कवि ने एक बूढ़ी औरत से मोल–भाव कर खरीदी थी। गुड़िया अपनी बड़ी सुंदर काली–काली आँखे खोल सकती थी और पिया–पिया भी बोल सकती थी। उसने सितारों से जड़ी लाल रंग की एक चुनरी ओढ़ रखी थी।

पाठ 2– दो गौरैया

यह कहानी भीष्म सहानी जी द्वारा रचित है। कहानी में दो गौरैया एक घर में अपना घोंसला बना लेती है। घर के सारे लोग इस बात से खुश थे सिवाय पिताजी के। वे चिडियों को वहाँ से बाहर निकलना चाहते थे और उनका घोसला हटा देना चाहते थे। मां परेशान थी की यदि चिड़या ने अंडे दिए होंगे तो वे टूट सकते है। चिड़ियां परेशान हो सकती है और वे बेचारी कहाँ जायेगी। इसलिए उन्होंने पिताजी को गंभीरता से चिडियों को न निकलने के लिए कहा। जब पिताजी घोंसला तोड़ने जाते है तो उसमें अंडे देख उसे वापस रख गोरियां को देख मुस्करा देते है।

पाठ 3– चिट्ठियों में यूरोप

यह पाठ लेखक की यूगोस्लाविया ,नेवीसाद यात्रा पर आधारित एक पत्र है। यह पत्र उन्होंने अपनी यात्रा के एक हफ्ते बीत जाने के बाद अपने परिवार को लिखा था। पत्र में उन्होंने वहाँ का वातावरण, खान–पान, रहन–सहन और संस्कृति के बारे में बताया है। उन्होंने वहाँ खेले जाने वाले खेल : फुटबॉल, स्केटिंग और टेबल टेनिस खेला जाता है, इनमें से स्केटिंग सबसे लोकप्रिय है। यहाँ के लोग खाने में सूप, योगर्ट आइसक्रीम, बीन्स, चावल और उसके साथ करी, ब्रेड बटर, जेली आदि खाते है। उन्होंने वहाँ बहने वाली दूना नदी और के बारे में भी बताया। लेखक अपने बच्चे को अच्छे से रहने और अपनी मां का ख्याल रखने की सलाह दी।

पाठ 4– ओस

सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित यह कविता प्रकृति के एक अद्भुत रत्न – ओस के बारे में हैं । कवि ओस के निर्माण, और ख्याति की बात करते है और उससे इतना सम्मोहित हों जाते है। वे ओस को रत्न कहते है क्योंकि वो घास फूलों और पत्तों पर बिखरी हुई एक रत्न के भाती चमकती है। उन्हें ओस की बूंदे जुगनू और आसमान के नन्हें तारों जैसी लगती है। वे कहते है की ओस कोई जोहरी के खज़ाने सी लगती है। उसे देख कर कवि का मन उसकी बूंदों को अपने हाथों में भरकर घर ले आने का करता  है और उसे निहाते हुए उसपर कविता लिखने का करता है।

पाठ 5– नाटक में नाटक

प्रस्तुत कहानी लेखक मंगल सक्सेना जी ने लिखी है। यह एक हास्य पद रचना है। लेखक हमें यह संदेश देना चाहते है की जीवन में विपरीत प्रतिक्रिया मिलने पर उसे कैसे सूज– भूज से ठीक किया जा सकता है। कहानी में बच्चें एक नाटक प्रस्तुत कर रहे होते है, उसके लिए उन्होंने मिल–जुलकर कुछ फालतू पड़े एक सार्वजनिक मैदान में फ़ूल–पौधे लगाए और एक मंच बना लिया। नाटक की प्रस्तुति वाले दिन नाटक बिगड़ने लगा। तब राकेश ने नाटक को संभाला। पर्दे के पीछे खड़े उसके साथी, दर्शक कब हैरान थे। राकेश ने नाटक में नाटक की रिहर्सल कर दी, मानो यहीं दर्शकों को दिखाना था।

पाठ 6– सागर यात्रा

सागर यात्रा भारत के पहले सागर विश्व दौरे का यात्रा वृत्तांत है। इसे कर्नल टी. सी. एस चौधरी ने लिखा है। यह यात्रा 10 भारतीयों ने "तृष्णा" नाम की नौका में की थी। लेखक ने इसमें समुद्र यात्रा के दौरान नौका में जीवन, उसमें आने वाली चुनौतियों के बारे में लिखा है। केसे हर समय एक व्यक्ति चक्के को संभाला है और व्हेल मछलियो और द्वीपों का ध्यान रखता है। समुद्र का पानी खारा होने से वो इस्तेमाल में नहीं लिया जा सकता है। समुद्री तूफ़ान और तेज़ हवाओं से जहाज़ दूर और दिशा हीन हो जाता है और उनके सारे उपकरण पंद्रह दिन के लिए खो जाते है और फिर मेहनत कर अपनी मंजिल पाने में सफल होते है।

पाठ 7– उठ किसान ओ

त्रिलोचन की यह कविता पाठकों को किसान की महत्ता से अवगत कराती है। कवि किसान के जीवन में वर्षा की आवश्यकता के बारे में बताते है। सावन बादल और किसान दोनों के लिए खुशियां लाता है। किसान के खेत हरे–भरे हवा में लहराते है और आसमान ने छाए बादलों से मौसम सुहाना हो उठता है। कवि ने बदलो को प्राणो में नया रंग भरने की संज्ञा दी है क्योंकि, वे गर्म हवा के लूँ के थपेड़े में गरज – बरसने धरती की प्यास बुझा देते है और किसान ये देख खुशी से झूम उठता है। पहाड़ों से शीतल पुरवाई किसान के लिए खुशी का संदेश लाती है, और बादल नाच–नाच कर फुहारों की चादर धरती को ओढ़ते है।

पाठ 8– सस्ते का चक्कर

सस्ते का चक्कर एक एकांकी है जिसे ‘सूर्यबाला’ ने रचित किया है। यह दो बालक नरेंद्र और अजय के बारे में है। नरेंद्र को बाहर का खाने की आदत थी। नरेंद्र को लॉली पॉप बेचने वाला मिला जो सस्ती लॉली पॉप बेंच रहा था। अजय ने उसे समझाते हुए कहा की या तो वह लॉली पॉप बेचने वाला चोर है या उसका सामान खराब है। चुकी उसके पैसे खत्म हो गए थे उसने अपनी फीस के रुपयों से वो खरीदने का सोचा। अजय की बात न मानने पर नरेंद्र बदमाशों के झांसे में आ गया और उसका अपहरण हो गया। अजय ने नरेंद्र को बदमाशों से बचाया।

पाठ 9 – एक खिलाड़ी की कुछ यादें

ये गद्यविधा केशव दत्त जी द्वारा लिखा गया है। वे हॉकी के उम्दा खिलाड़ी रहे है और उन्होंने अपने खेल जीवन की कुछ यादें इस संस्मरण में लिखी है। लेखक बैटमिंटन चैंपियन थे लेकिन एक दिन ध्यानचंद को स्कूल ग्राउंड में खेलते देख वे उनसे प्रभावित हो गए। ओलंपिक में उसी मुल्क ने जिसने हम पर राज किया था उसे उसके घर हराया। इंग्लैंड की क्वीन भी वहाँ मौजूद थी। उन्होंने हॉकी के गिरते हुए स्तर का अफसोस है। वे खेल के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ाना चाहते है। खिलाड़ियों के लिए बेसिक सुविधाएं बढ़ाने की मांग कर रहे है। वे खेल को पढ़ाई जितनी महत्ता देने की मुहिम कर रहे है।

पाठ 10 – बस की सैर

वल्ली कानन जी द्वारा रचित यह कहानी एक बच्ची  की बस  में बैठने की चाह पर लिखी है। वल्ली ने बस में बैठने के लिए अपनी इच्छाओं से समझोते किए। एक दिन उसके पास इतने रुपए इखटते हुए की वो बस में बैठ गई। शहर की और जाते हुए उसने बस की खिड़की से बाहर नहर और ताड़ के पेड़ देखे, पर्वत, नीला आकाश, खेत और खाई देखी। उसने सड़क पर अपनी दुम ऊंची किए एक बछिया देखी। कुछ देर बाद वो सड़क पर मारी पड़ी थी। यह देख वल्ली ने मन उठ गया और उसने खिड़की से बाहर देखना बंद कर दिया।

पाठ 11 – हिन्दी ने जिनकी जिंदगी बदल दी

जय प्रकाश पाण्डे जी ने इस पाठ में मारिया से अपनी मुलाकात के बारे में लिखा है। पाठ भारत से राष्ट्रपति द्वारा समन्नित  विद्वान विदुषी महिला मारिया की हिंदी से जुड़ी कहानी से था।उन्होंने कई हंगेरियन किताबों का हिंदी में अनुवाद किया था। मारिया ने ग्रीक, लेटिन, यूनानी और संस्कृत भाषाओं का अध्यन किया था। जब वे बुडापेस्ट में थी तो वहाँ सलवार कमीज़ पहनती थी। यह उन्हें ठंड से बचाती थी। पाठ में मारिया ने लेखक को बताया है की केसे हिंदी भाषा से उनका जुड़ाव हुआ, केसे यहां के लोगों ने अतः यहां के शहरों आदि से वे प्रभावित हुई।

पाठ 12 – आषाढ़ का पहला दिन

यह कविता श्री भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित है। किसान को बदलो का इंतजार है क्योंकि बारिश के बाद धरती की प्यास बुझ जायेगी और किसान की फसल को पानी मिलेगा। बारिश से किसान की खेती लहरा कर हरी–भारी हो उठेगी। वह बेसब्री से अपनी सुखी फसल के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा है। कवि ने किसान को चातक पक्षी के साथ तुलना कर बोला है की किसान और चातक दोनों आकाश में देख के बारिश का इंतज़ार करते है। बारिश के आते ही उन्हें ऐसा लगता है मानों उनकी आशा पूरी हो गई और उनकी तपस्या काम आई।

पाठ 13 अन्याय के खिलाफ़

अन्याय के खिलाफ चकमक किताब से उठाई गई एक कहानी है। कोया आदिवासी आंध्रप्रदेश के जंगलों में खेती कर के अपना जीवन गुजरते थे। राम राजू ने उन्हें इस अत्याचार से बचाने के लिए विद्रोह करने कहा। कोया आदिवासी पगडंडियों से गुजरने वाली सेना के अंग्रेज कमांडर और सारजेंट पर निशाना लगाती। अंग्रेज़ ने जंगल में राशन लाने वाले रास्ते बंद कर दिए और उन्हें भूखे मारने का सोचा। राम राजू ने उन्हें बचाने के लिए आत्म समर्पण कर दिया। उनके शहीद होने से कोया आदिवासियों का आंदोलन टूट गया परंतु अंग्रेज सरकार ने उनके साथ मनमर्जी और अत्याचार करना बंद कर दिया।

पाठ 14   बच्चों के प्रिय केशव शंकर पिल्ले

यह पाठ आशारानी वोहरा ने लिखा है। इसमें उन्होंने श्री केशव पिल्ले के व्यक्तित्व और उनके जीवनकाल के बारे में हमें जानकारी दी है। पाठ में उनके देश विदेश घूम कर गुड़ियों के संग्रह के बारे में बताया। गुड़िया मेहगी होती है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जगह भी चाहिए होती है। वे इस संग्रह से बच्चों को सब जगह के रीति, संस्कृति और पहनावे से परिचित करना चाहते थे। केशव पिल्ले एक प्रख्यात कार्टूनिस्ट, लेखक थे। पत्रिका में उनका लेख और उनके बनाए गए कार्टून आते थे। वे बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं और सम्मेलन भी आयोजित किया करते थे।

पाठ 15 – फर्श पर कविता

निर्मला गर्ग जी द्वारा रचित यह कविता फर्श पर आधारित है। कविता में लेखीका बताती है की फर्श पर कोन क्या क्या बिखेरता है जिसे सूरज धूप, चिड़िया तिनका, बच्चा दूध , हवा से धूल, मां चावल के दाने और पापा जूते बिखेर देते है। इस सब में सिर्फ एक महरी ही है जो फर्श पर झाड़ू–पोंछा लगती है और सारे घर को साफ रखती है। महरी के सफाई करते हुए पोंछा लगाते दौरान फर्श पर कुछ लाइनें छूट जाती है। इन लाइनों को देख कर कवयित्री कल्पना कर रही है की महरी फर्श पर कविता लिख रही है।

पाठ 16 बूढ़ी अम्मा की बात

यह एक लोक कथा है। कैसे एक बूढ़ी अम्मा ने थके हारे किसान को काम के लिए प्रोत्साहित किया। तीन साल से वर्षा काम हुई थी इस साल भी बारिश की कोई आशा नहीं थी। गोमा इसी बात से निराश हो कर घर के और निकल गया। उसे बूढ़ी अम्मा ने देख कर कहा की यह समय आराम का नहीं खेत जोतने का है। अम्मा ने उसे समझाया की वर्षा का आना हमारे हाथ में नहीं पर तुम खेत जोत कर तैयार करो प्रकृति अपना काम करेगी। अगले दिन उसने उत्साह से खेत जोत और आखिरकार सालों बाद वर्षा हुई।

पाठ 17 वह सुबह कभी तो आए ही।

यह पाठ एक निबंध विधा में लिखा गया है। यह भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित लेखिका सलमा ने लिखा है। लेखिका एक सुनहरे भविष्य की कामना कर रही है जब वे इस त्रासदी के दुष्प्रभावो से ठीक हो जाएगी। सलमा की मां की मानसिक स्थिति बेहद बिगड़ गई थी। सलमा और उसकी जुड़वा बहन जल्दी से स्वस्थ हो कर अपनी मां की देखभाल करना चाहती और उन्हें हर सुख देना चाहती है। सलमा आयुर्वेक दवाएं लेने लगी जिससे उनके पाव के छाले सुख रहे है, पसलियों का दर्द जा रहा है, चेहरे की सूजन, बदन दर्द, गले से खून आना और सर दर्द बंद हो गया है।

NCERT कक्षा 8 हिंदी पाठ्यपुस्तक "भारत की खोज"

पाठ 1– अहमदनगर का किला

यह किताब प. जवाहरलाल नेहरू जी द्वारा 1944 में लिखी गई है। उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के समय 9 बार जेल में डाला गया था। नौवी बार जब वे गिरफ्तार हुए तब उन्हें अहमदनगर जेल में हुए अनुभव पाठ में लिखे है। चांद देख कर उन्हें दिन, महीनों का भान होता था। उन्हें वहां बागवानी का काम मिला था। उन्होंने फूल बेहद पसंद थे जिसके लिए उन्होंने क्यारियाँ बनाई। अहमदनगर किले में चांदबीबी नाम की एक सुंदर महिला के साहस का है। नेहरू जी को खुदाई करते वक्त किले की पुराने हिस्से भी ज़मीन से मिले। वर्तमान पीढ़ी को अतीत के बारे में जानकारी के लिए उन्होंने यह पाठ लिखा था।

पाठ 2 –तलाश

इस पाठ में नेहरू जी देश के बारे में अपने विचार प्रकट कर रहे है। वे भारत की सभ्यता और संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कह रहे है की वो इतनी महान है की उसे कितना भी संग्रष करना पड़े वो बनी रहेगी। इसमें भारत के अतीत की जानकारियां दी गई है। स्वतंत्रता के संग्राष को बताया गया है। वे जेल में भारत के बारे में सोच रहे है और अपने बचपन और जवानी में भारत की झलक का विश्लेषण कर रहे है। वे एक आलोचक जैसे देश को देखने की बात कर रहे है। वे सिंधु घाटी की सभ्यता याद कर रहे थे, भारत के साहित्य और सभ्यता समझा रहे हैं।

पाठ 3 -सिंधु घाटी की सभ्यता

नेहरू जी भारत की प्राचीन संभ्यता से प्रभावित है, उनमें से सिंधु घाटी की सभ्यता तो छः से सात हज़ार साल पुरानी है। मोहनजोदरो और हड़प्पा दोनों उस समय के विकसित नगर थे। वे कृषि और व्यापार क्षेत्र में भी आगे थे, इनका संबंध फारस, मेसोपोटामियां और मिस्त्र से है। सिंधु घाटी खत्म होने के बाद आर्यो का आगमन हुआ। हमारे चार वेद ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद, यजुर्वेद है। यही परिवर्तन आधुनिक युग की जाती व्यस्था है। फिर उपनिषद् आए ये समजन और सच्चाई का रास्ता है। प्राचीन काल के दो महाकाव्य महाभारत और रामायण ने लोगों में एकता बढ़ाई। जैन और बौद्ध धर्म वैदिक धर्मों से अलग थे। इसके बाद चंद्रगुप्त ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की जिस के उत्तराधिकारी अशोक हुए।

पाठ 4 –युगों का दौर

मौर्य समाज के बाद शुंग वंश आया इसके बाद कुषाणो ने भारतीयकरण किया। गुप्त साम्राज्य ई. 320 मैं आरंभ हुआ। यह साम्राज्य  युद्ध और शांति दोनों कलाओं में सफल हुए। दक्षिण भारत में मौर्य साम्राज्य के बाद कई राज्य फले–फूले। यह राज्य व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। उत्तर भारत पर बार बार हमलों से लोग दक्षिण जा कर बस गए। भारत का रंगमंच अपने आप में स्वतंत्र था। रंगमंच का उद्गम ऋग्वेद में मिलता है जिसमें एक प्रकार की नाटकीयता है। इस कला पर रचित नाट्यशास्त्र की रचना कहा जाता है। बुद्ध की जीवनी बोध्यचारित उस समय चीन, तिब्बत और भारत में लोकप्रिय हुई। यूरोप में भारतीय नाटक के बारे में कालिदास के शकुंतला के अनुवाद के द्वारा पता चला।

पाठ 5नई समस्याएं

हर्ष उत्तर भारत में राज्य कर रहे थे। 1000 ई. में महमूद गज़नवी ने भारत पर आक्रमण किया और भारतीय खजाना गज़नी ले गया। उसके बाद शहाबुद्दीन गौरी ने लाहौर और दिल्ली पर आक्रमण किया और पृथ्वीराज चौहान से हार गया। अफगानिस्तान और 1 साल बाद नई फौज लेकर जीता और दिल्ली के तख्त पर बैठ गया। 1526 में बाबर ने मुगल साम्राज्य की नींव डाली। बाबर के बाद अकबर शाहजहां और जहांगीर ने तुर्क–मंगोल वंश को प्रशासन, कला व संस्कृति में आगे बढ़ाया। दिल्ली आगरा में वास्तुकला ने उन्नति की।औरंगजेब ने शांति प्रिय वातावरण को खंड किया। मराठा और टीपू सुल्तान को हराकर ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय खजाना लेना शुरू किया।

पाठ 6 – अंतिम दौर 1

अंग्रेजी शासन ने भारत के आर्थिक ढांचे पर प्रभाव डाला। अंग्रेजों ने बड़े जमींदार पैदा कर अधिक लगान लगाना शुरू किया, ज़मीन बिकाऊ वस्तु हो गई। । अंग्रेजों ने पाश्चात्य संस्कृति को भारत लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 18वीं शताब्दी में राजा राममोहन राय ने अलग-अलग धर्म और संस्कृति के स्त्रोत की खोज की। 1857 में सैनिक विद्रोह ने जन आंदोलन का रूप ले लिया। ब्रिटिश पार्लियामेंट ने ईस्ट इंडिया कंपनी से देश को अपने हाथ में ले लिया। विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की जिसमें सांप्रदायिकता नहीं थी। रविंद्र नाथ टैगोर ने भी मानवता को प्रभावित किया। अब्दुल कलाम आजाद ने युवा पीढ़ी के दिमाग में उत्तेजना पैदा की।

पाठ 7 अंतिम दौर 2

पहला विश्व युद्ध खत्म होने के बाद देश में दमनकारी कानून और पंजाब में मार्शल लॉ लागू हुआ। देश में किसान भयभीत कारखानों के मजदूरों की स्थिति गंभीर और मध्य वर्ग व बुद्धिजीवी लोग अंधकार में थे। उस वक्त गांधी जी ने ब्रिटिश काल के भय से भारत वासियों को न डरने का हौसला दिया। उन्होंने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया। आर्थिक सामाजिक और दूसरे मामलों में गांधी जी के विचार बहुत सख्त थे। उन्होंने भारत वर्ष में एक मनोवैज्ञानिक क्रांति पैदा की। भारत के अल्पसंख्यक धार्मिक दृष्टि से थे। एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना करना चुनौती था।

पाठ 8– तनाव

1942 से भारत में तनाव शुरू हुआ। 7 और 8 अगस्त को अखिल भारतीय कमेटी ने एक प्रस्ताव जाहिर किया जो आज भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से जाना जाता है। कांग्रेस कमेटी ने इस बात की स्वीकृति देना तय किया कि गांधी जी के नेतृत्व में अहिंसात्मक ढंग से एक जन आंदोलन शुरू किया जाए। अब्दुल कलाम आजाद और गांधी जी ने अपने अंतिम भाषण में यह साफ कह दिया कि उनका अगला कदम ब्रिटिश सरकार से सम्मान पूर्ण समझौता के लिए अपील करना होगा। 8 अगस्त सन 1942 को प्रस्ताव पास हुआ कुछ घंटों बाद सुबह-सुबह मुंबई में पूरे देश में अनेक स्थानों पर बहुत से गिरफ्तारियां हुई और इस तरह अहमदनगर की लेख में आए।

पाठ 9 दो पृष्टभूमियाँ —भारतीय और अंग्रेजी

भारत में अगस्त सन 1942 में जो हुआ लोगों के अंदर छुपे तीव्र भावना थी कि राज्य अब बर्दाश्त नहीं करेगा। नेताओं की गिरफ्तारी से जनता के अंदर फूट रहा आक्रोश सामने आया। युवा पीढ़ी ने हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों तरह के कार्यवाहियों में बढ़ कर हिस्सा लिया। सन 1942 में 1028 लोग मारे गए,3200 घायल हुए। इसके बाद भारत में अकाल और मलेरिया और हैजा जैसी महामारी फैली। भारत के मजबूत लोगों ने मशाल को आगे लेकर गुलामी को हमारे लिए अतीत में छोड़ा है।

NCERT कक्षा 8 हिंदी पाठ्यपुस्तक "संक्षिप्त बुद्धचरित"

पाठ 1 –आरंभिक जीवन

प्राचीन काल में इक्ष्वाकु वंश नामक एक राजवंश था। वंश के राजा शुद्धोधन एवं रानी माया थी। वहां की राजधानी कपिलवस्तु थी। पुष्य नक्षत्र में उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया। बालक के जन्म से अपूर्व शांति का वातावरण बना। महर्षि असित भी उस बालक को देखने आए। उन्होंने भविष्यवाणी की किया बालक शिक्षा पर चलकर लोग शान्ति और मोक्ष को प्राप्त करेगा। राजा ने बालक का नाम सिद्धार्थ रखा। उनका विवाह यशोधरा नाम की कन्या से कराया गया और उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ। समय बीतने पर सिद्धार्थ को यह ज्ञात हुआ कि सब कुछ सैनिक है सब कुछ अनित्य है।

पाठ 2अभीनिष्क्रमण

राजकुमार शांति प्राप्त करने के लिए कुछ मित्रों के साथ वन गए। राजमहल लौटकर राजकुमार ने राजा से मोक्ष प्राप्ति के लिए संन्यास लेने की आज्ञा मांगी। उस रात राजकुमार घोड़े पर सवार अपने प्रियजनों को त्याग कर नगर से निकल गए। वे भार्गव ऋषि के आश्रम के द्वार पर रूखे। छदक को अपने आभूषण दे कर विदा कहा। राजा ने राजकुमार की खोज के लिए मंत्रीगण भेज दिए। कुमार पुरोहित को राजकुमार एक वृक्ष के नीचे बैठे दिखे परंतु उन्हें वापस खाली हाथ जाना पड़ा। राजकुमार मगध पहुंचे और भिक्षा मांगकर पांडव पर्वत पर जाकर बैठ गए। वहां मगध के राजा बिंबिसार ने उन्हें समझाने का प्रयत्न किया परंतु कुमार के अडिग संकल्प को हिला नहीं पाए।

पाठ 3ज्ञान प्राप्ति

राजकुमार ने आराड मुनि के आश्रम में प्रवेश किया। मुनि ने उनका स्वागत करते हुए कहां की वे उनके इस दृढ़ संकल्प को देखकर उनकी परीक्षा नहीं लेंगे। आराड मुनि ने उन्हें अपने सिद्धांत सुनाएं, उससे भी कुमार को संतोष नहीं हुआ और वे वहां से निकलकर कुमार उद्रक ऋषि के आश्रम में गए। वहां भी परम पद ना मिलने पर वे राजर्षि गए के "नगरी" नामक आश्रम में गए। वहां से एकांत विहार की इच्छा में नैरंजना नदी के तट पर पांच ऋषि के साथ में तपस्या करने लगे। कठोर तपस्या से बोधिसत्व दुर्बल हो गए थे। उन्होंने फिर साधना करने का संकल्प लिया। अतः ध्यानावस्थित होकर बुद्ध ने मुक्ति प्राप्ति कर ली।

पाठ 4 – धर्मचक्र प्रवर्तन

बुद्धत्व को प्राप्त करने के बाद शाक्यमुनि को शक्ति का अनुभव हुआ। उन्होंने शत्रु के समान क्लेशों को जीत लिया था इसलिए लोग उन्हें बुद्ध कहते थे। विज्ञान प्राप्ति के लिए काशी की ओर रवाना हुए। जन-जन के सुख के लिए शाक्यमुनि ने धर्मचक्र प्रवर्तित कर दिया।  कुछ समय बाद इन शिष्यों में से 8 को अलग-अलग दिशाओं में कल्याण के लिए भेजा। भगवान बुद्ध गया पहुंचकर कश्यप मुनि के आश्रम गए। वहां उनके 500 शिष्यों ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया। कुछ दिनों में वे अपने शिष्य मंडली के साथ अपने पिता की नगरी के समीप पहुंचे। उन्होंने राजा को धर्मोपदेश दिया। वहाँ से आम्रपाली के उद्यान में उसे उपदेश दिया।

पाठ 5 – महापरिनिर्वाण

आम्रपाली के घर भिक्षा लेकर भगवान बुद्ध चतुर्मास वास के लिए वेणुमति गए। उसके बाद मर्कट नदी पर निवास करने लगे तभी उनके पास मार आया और उनसे उनके निर्वाण की याचना करने लगा। निर्वाण की बात सुनकर शिष्यों ने भगवान बुद्ध को घेर लिया। भगवान बुद्ध ने उन्हें समझाया और अपने अपने घर जाने की आज्ञा दी और स्वयं भोगवती नगरी की ओर चल पड़े। अपने अनुयायियों को उन्होंने लोग धर्म का अनुसरण करने को उपदेश दिया और पापापुर के लिए निकल गए। वहां अपने भक्तों चंद के घर अंतिम भोजन के बाद कुशीनगर के लिए प्रस्थान किया। अंतिम शय्या पर लेट कर गए। अर्धरात्रि बीतने पर अपने शिष्यों को आखरी उपदेश दिया और ध्यान में प्रवेश कर सदा के लिए शांत हो गाएं।

कक्षा 8 हिंदी पे आकाश द्वारा निर्मित एन.सी.इ.आर.टी (NCERT) हल पे नित्य पूछे जाने वाले प्रश्न:

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