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NCERT Solutions for Class 6 Hindi

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कक्षा ६ की हिंदी का पाठ्यक्रम छात्रों की हिंदी भाषा विकास एवं उन्नति को लक्ष्य बनाकर निर्धारित किया गया है।  पाठ्यक्रम कथा, कविता, एवं व्याकरण तीनो पक्षों पे ज़ोर देता है। हिंदी एक बेहद ही सुन्दर परन्तु कठिन भाषा है और इसको सीखना भी अत्यंत आवश्यक है। ये हमारी देश की राजकीय भाषाओं में से एक है। 

ये बेहद आम बात है कि किसी छात्र को पाठ्क्रम में सहायता की आवश्यकता पड़े।  आकाश संस्थान द्वारा बनाया गया कक्षा ६ हिंदी एन.सी.इ.आर.टी (NCERT) हल आपकी इस समस्या में आपकी सहायता करेगा। प्रश्नों के हल का यह संग्रह आकाश संस्थान के अनुभवी शिक्षकों द्वारा किया गया है तथा इसकी भाषा बेहद सरल रखी गयी है।    

कक्षा 6 हिंदी पाठ्यक्रम वसंत ,दुर्वा व बाल राम कथा में विभाजित हैं।

वसंत

पाठ-1 वह चिड़िया जो

इस कविता में कवि ने एक चिड़िया के बारे में बताया है जिसे प्रकृति की सभी चीजों  से बहुत प्यार है।उसे बारिश की बूंदों को पीना अच्छा लगता है, खेतों से अनाज चुगना अच्छा लगता है और सबसे ज़्यादा उसे खुले आसमान में बिना किसी रोक-टोक और डर के उड़ना अच्छा लगता है। यदि हम सरल शब्दों में कहें तो उसे आज़ाद रहना पसंद है जहाँ न तो उसे शिकारी से पकड़े जाने और न ही किसी ओर से पिंजरे में बंद होने का खतरा हो।

पाठ-2 बचपन

इसमें लेखिका अपने बचपन को याद करती हुई कहती हैं कि कितनी जल्दी वे फ्रॉक से अब कुर्ते पहनने लगी हैं। इससे उनका मतलब है कि वक़्त कितनी जल्दी बीत गया जब वे छोटी थीं तो रंग-बिरंगी, नीली,पीली , गुलाबी फ्रॉक पहना करती थी मगर अब वे बड़ी हो गयी हैं और वे कुर्ता व सलवार पहनने लगी हैं।इसमें लेखिका बताती हैं कि समय कितनी जल्दी बीत जाता है और उसी समय के बीतने के साथ-साथ हमारा पहनावा भी बदल जाता हैं।

पाठ-3 नादान दोस्त

यह कहानी केशव और श्यामा दोनो भाई-बहन की बचपन में की गयी नादानी के बारे में है, जिसमें उनके घर में खिडक़ी पर एक चिड़िया अंडे देती है दोनो बच्चे चिड़िया के लिये दाना पानी रख देते हैं और उसका पूरा ख्याल भी करते हैं पर एक दिन उसके अंडे को छू लेते हैं, जिससे चिड़िया अंडे छोड़कर चली जाती है और अंडे नीचे गिरकर टूट जाते हैं,इसके बाद उन बच्चों की माँ उन्हें बताती हैं कि चिड़िया के अंडों को कभी छूना नहींचाहिये।

पाठ-4 चाँद से थोड़ी सी गप्पे

इस कविता में एक छोटी सी बच्ची चाँद से उनके रंग रूप को लेकर कई सवाल पूछती है। यह कविता 11 साल की बच्ची के ऊपर लिखी गयी है जो चाँद से कहती है कि आप कभी तिरछे तो कभी गोल नज़र आते हैं। आज छोटे हैं परन्तु किसी दिन काफी बड़े नज़र आते हैं।  आज आसमान में इस ओर तो कल दूसरी ओर नज़र आते हैं और कभी कभी तो काले बादलों के पीछे छुप जाते हैं।  ऐसा क्यों ? वो चाँद से उनके बारे में जानना चाहती है।

पाठ-5 अक्षरों का महत्व

इस पाठ में अक्षर हमारे जीवन मे कितने जरूरी हैं इस बात पर काफी जोर दिया गया है। सच में अक्षर हमारे जीवन में ज्ञान बांटने, बाते करने आदि के लिये कितने जरूरी है। पहले के जमाने के लोगो को लगता था कि अक्षरों की खोज भगवान ने की थी पर ऐसा नहीं है क्योकि उन्हें लगता था कि ये सृष्टि अगर भगवान ने बनाई है, तो बोलचाल के लिये अक्षर भी उन्ही ने बनाए होंगे। परन्तु सच तो यह है, कि अक्षरों की खोज मनुष्य ने खुद ही की है।

पाठ-6 पार नज़र के

इस पाठ में मंगल ग्रह पर भी पहले जीवन था और वहाँ भी लोग रहते थे, ऐसी कहानी का विवरण है। कहानी हमें यह बतलाती है कि, वातावरण में होने वाले बदलाव के कारण सब नष्ट हो गया पर अभी भी वैज्ञानिक खोज में लगे हैं और मंगल ग्रह पर जीवन था इस बात का पता लगा रहे हैं। एक बार छोटू भी आने पापा के सिक्योरिटी पास को लेकर सुरंग में चल जाता है पर वहाँ काम करने वाले उसे पकड़कर घर पर छोड़ जाते हैं। धरती के नीचे क्या है, वह यह नहीं देख पाता ,यह बात आज भी एक पहेली ही बनी हुई है।

पाठ -7 साथी हाथ बढ़ाना

इस कविता में कवि ने हर काम को एक साथ मिल-जुल कर करने की शिक्षा दी है। इसमें साहिर लुधियानवी जी ने कहा है कि हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिये और अगर एक व्यक्ति थक जाये तो दूसरे को आगे बढ़कर उसका सहारा बनना चाहिए। उसे अकेला छोड़कर दूर भाग जाना उचित  नहीं है । क्योकि ऐसा हमेशा कहा जाता है कि एक से भले दो और साथ मिलकर काम करने में लोगो मे प्यार भी बढ़ता है और काम भी जल्दी हो जाता है।

पाठ-8 ऐसे-ऐसे

यह कहानी एक बच्चे के गृहकार्य न करने व टीचर की डांट से बचने के बहाने के बारे में है। वह बच्चा पूरे दिन खेलता रहता है और सुबह उठते ही उसे याद आता है कि उसने अपना गृहकार्य ही पूरा नहीं किया है। अगर वह ऐसे ही स्कूल जाएगा तो उसके अध्यापक उसको सज़ा देंगे, बस इसी डर से वह अपने माता-पिता से कहता है कि उसके दिल मे कुछ तकलीफ़ हो रही है। पिता जी डॉक्टर को बुला लाते हैं, परन्तु बच्चे को उनकी दवा से भी कुछ आराम नहीं मिलता है।  अंत में टीचर ही घर आकर कहते हैं कि आज काम करके कल स्कूल आ जाना।

पाठ -9 टिकट एल्बम

यह राजप्पा नाम के लड़के की टिकट इकठ्ठा करके, उसके एल्बम बनाने की कहानी है। राजप्पा को टिकट इकट्ठा करने का बड़ा ही शौक़ था वो साइकिल से कई किलोमीटर की दूरी तय करके दूसरे गाँव जाता था और वहाँ से टिकट लेकर आता था टॉकी वो अपना टिकट एल्बम पूरा बना सके। इस पाठ में हमें राजप्पा के मन में किसी काम को पूरा करने का जुनून दिखाई देता है। कुछ पाने की आस में उसे एक जगह से दूसरी जगह जाने की दूरी भी ज्यादा नहीं लगती है।

पाठ-10 झाँसी की रानी

यह कविता रानी लक्ष्मीबाई की जीवन की महान गाथाओं के बारे मे है। इस कविता को सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा है इसमें लक्ष्मीबाई के जन्म, नानासाहेब से शिक्षा लेना व उनके साथ खेलना ओर फिर झांसी के राजा से विवाह उल्लेख है। कहानी आगे बतलाती है कि  वे जल्द ही विधवा हो जाती हैं और एक पुत्र को गोद ले लेती हैं। उनकी वीरता के बारे में बताया गया है कि कैसे घोड़े पर बैठकर लक्ष्मीबाई ,पुत्र को अपनी पीठ पर बांधकर अंग्रेजों से लड़ते लड़ते इस दुनिया को छोड़ जाती हैं। उनकी जीवन की गाथा सबसे अनोखी और यादगार है।

पाठ-11 जो देखकर भी नहीं देखते

इस पाठ में मनुष्यों को उनका जीवन बेहतर बनाने व प्रकृति का सम्मान करने की सीख दी गयी  है।यह पाठ हेलेन केलर ने लिखा है जो जन्म से ही अंधी थीं, और चल नहीं पाती थीं। जब कोई कहीं से घूमकर आता और वे उनसे पूछती की उन्होंने वहाँ क्या देखा तो लोग अक्सर "कुछ खास नहीं" यह जवाब देते। लेखिका न ही तो कहीं जा पाती थीं और न ही कुछ देख पाती थीं इसलिये उनके मन में आसपास की चीज़ों को जानने की बड़ी इच्छा रहती थी।

पाठ-12 संसार पुस्तक है

इसमे नेहरू जी ने अपने पत्र से इंदिरा जी को संसार के इतिहास के बारे में बताया है। नेहरू जी लिखते है कि इतिहास को जानने का मतलब यह नहीं होता है कि आप जिस देश में रहो केवल उसी देश के बारे में जानो, बल्कि इतिहास तो सभी महाद्वीप, देश, धर्म, सम्प्रदाय आदि से मिलकर बना है। यदि आप केवल एक देश के बारे में पढ़ोगे तो उसी देश के होकर रह जाओगे। लेकिन अगर आप इतिहास पढ़ोगे तो सभी देशों के बारे में जान पाओगे।

पाठ-13 मैं सबसे छोटी होऊँ

यह कविता एक बच्ची की है जो अपनी माँ की सबसे छोटी संतान होकर लम्बे समय तक उनका प्यार पाना चाहती है। बच्ची चाहती है कि वो अपनी माँ की सबसे छोटी संतान रहे जिससे वो अपनी माँ के साथ सबसे ज्यादा समय बिता पाएगी ओर उसकी माँ का प्यार सबसे ज्यादा उसे ही मिलेगा। सरल शब्दों में यह कविता एक मासूम बच्ची के बचपन के ख्यालों के बारे में बताती है जो अपनी माँ से बहुत प्यार करती है और उनके साथ ज्यादा समय बिताना चाहती है।

पाठ-14 लोकगीत

इसमे लेखक ने बताया है कि लोकगीत किस तरह रोज़ की ज़िंदगी पर बनाये जाते हैं। उन्होंने बताया है कि लोकगीत किसी व्याकरण की शैली आदि से मिलकर नहीं बनते बल्कि ये तो लोग अपने इलाके की बोली में बनाते हैं और शादी, तेज़ त्यौहार इत्यादि में एक साथ मिलजुल कर ढोलक आदि के साथ गाते हैं। इन लोकगीतों को गाने में जो उत्साह उस इलाके के लोगों को आता है उतना किसी और को नहीं आता होगा।

पाठ-15 नौकर

यह पाठ गाँधी जी के साबरमती आश्रम में खुद ही ज्यादा से ज्यादा काम करने के बारे में है जब लेखक साबरमती आश्रम गए तो उन्होंने देखा कि गाँधी जी आश्रम में झाड़ू खुद ही लगाते हैं। हमेशा आश्रम में देशी व विदेशी मेहमान आते रहते हैं पर फिर भी गाँधी अपने काम करते रहते हैं उनके मन में किसी भी काम को करने में शर्म नहीं आती है। और लेखक गाँधी जी के इस रूप को देखकर उनसे काफी खुश भी हुए थे। क्योकि लेखक ने कभी भी किसी आश्रम के मालिक को इतना काम करते हुए नहीं देखा था।

पाठ-16 वन के मार्ग में

इसमे तुलसीदास जी ने ये उल्लेख किया है कि  वन के रास्ते में किस तरह सीता जी थक जाती हैं और राम जी के उनकी हालत को देखकर दुखी होते हैं। नगर से थोड़ी ही दूर चलकर ही सीता जी राम जी से पूछती हैं कि अभी कितनी दूर ओर चलना है, तथा उन्हें प्यास लग रही है। वे यह पूछती हैं कि अब अपनी कुटिया किस जगह पर बनाएंगे। सीता जी को इस तरह देखकर राम जी सोचते हैं कि उनके कारण महलों में रहने वाली सीता आज वन में उनके साथ भटक रही हैं।

पाठ-17 साँस- साँस में बाँस

इस पाठ में लेखक ने बताया है कि किस तरह से नये-पुराने , छोटे- बड़े सभी बाँस हमारे काम आते हैं। बाँस पूरे भारत मे पाये जाते हैं और एक से तीन साल के बाँस कई चीजों को बनाने के काम आते हैं। इनमें रोज की जरूरत की चीज़ें जैसे- टोकरी, बाँसुरी, वर्तन आदि शामिल हैं। बाँस से केवल सजावट के सामान ही नहीं बनते बल्कि रोज़ की उपयोग की वस्तुएं जैसे डलिया आदि भी बनती हैं जो बहुत मजबूत होती हैं।

बाल राम कथा

पाठ-1 अवधपुरी में राम

इस पाठ में अयोध्या के राजा दशरथ, उनकी रानियों कौशल्या, कैकेयी व सुमित्रा के बारे में बताया गया हैं, तथा राजकुमार राम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न के जन्म, उसकी शिक्षा-दीक्षा व महर्षि विश्वामित्र द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिये राम को लेने आने व राम-लक्ष्मण के यज्ञ रक्षा के लिये जाने तथा किस तरह 16 साल के राम को खुद से दूर जाने की बात सुनकर दशरथ बार-बार बेहोश हो जाते हैं, इसका उल्लेख है। कहानी आगे यह  बताती है कि राज मुनि वशिष्ठ के कहने पर दशरथ, श्रीराम के यज्ञ रक्षा पर जाने को हाँ देते हैं।  

पाठ-2 जंगल और जनकपुर

राम-लक्ष्मण यज्ञ की रक्षा करते हैं और राक्षसी ताड़का का मारते हुये आगे जनकपुर की और बढ़ते हैं। इसी पाठ में अहिल्या के श्राप के बारे में, राम के सीता स्वंयवर में धनुष तोड़ने व कैसे शिव जी के धनुष के टूट जाने के बाद परशुराम जी के क्रोध और उनके और लक्ष्मण के बीच संबाद के बारे में बताया गया है। पाठ राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी व शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह के बारे में बताता है। इस पाठ में खुशी, क्रोध व दुःख सभी का अनूठा संगम है।

पाठ-3 दो वरदान

यहाँ राम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा के कहने पर कैकेयी राजा दशरथ को याद दिलाती हैं कि उन्होंने रानी को वचन दिया था। दासी मंथरा की बातों में आकर रानी कैकेयी बिना कुछ सोचे राजा से कहती है कि वे उनसे जो दो वचन माँगेगी और वचनबद्ध राजा उसे पूरा करेंगे, रानी अपने उन्हीं दोनों वरदानों में भरत का राज्याभिषेक व राम को 14 वर्ष का वनवास माँग लेती हैं। रघुकुल की रीति के अनुसार राजा अपने वचनों से पीछे भी नहीं हट सकते थे।

पाठ-4 राम का वन गमन

यहाँ पर राम ख़ुशी-ख़ुशी वन जाने के लिये तैयार हो जाते हैं उनके साथ सीता जी व लक्ष्मण जी भी साथ में तैयार हो जाते हैं। रानी सुमित्रा लक्ष्मण जी से कहती है कि पुत्र अब तुम वन को अयोध्या समझना और राम को दशरथ तथा सीता को अपनी माता समझना। तीनो ही लोग अयोध्या से विदा लेकर वन की ओर जाने लगते हैं, तीनो लोगो को इस तरह नगर से जाता देख नगर के लोग, पशु- पक्षी, पेड़- पौधे उदास हो जाते हैं, और रानी कैकेयी को बुरा-भला कहते हैं।

पाठ-5 चित्रकूट में भरत

दशरथ के स्वर्गवास के बाद भरत कैकेयी से कहते हैं कि आपने मेरे पिता समान भाई को वन भेज दिया ताकि मैं खुश रहूं पर मेरी खुशी तो उन्ही के चरणों में है। आप माता नहीं, आप तो कुमाता निकलीं। ऐसा कोई  दुश्मन के साथ भी नहीं करता। आगे भरत, कौशल्या व कैकेयी के साथ राम को अयोध्या वापस ले जाने के लिये चित्रकूट जाते हैं। कई बार कहने पर भी जब राम नहीं मानते तो भरत श्री राम के पैरों की खड़ाऊ को अपने सिर पर रखकर दुःखी मन के साथ अयोध्या लौट आते हैं।

पाठ-6 दण्डक वन में 10 वर्ष

भरत के जाने के बाद राम-सीता व लक्ष्मण दण्डक वन में ही एक कुटिया बनाकर वहाँ 10 वर्ष तक रहते हैं। वहाँ उन तीनों लोगों ने साधारण लोगों की तरह जीवन जिया, इसमें उन्होंने साधुओं की सेवा की, राम व लक्ष्मण ने अपने पराक्रम से पूरे दण्डक वन को भयानक राक्षसों से बचा लिया और वन में सुख-शांति हो गयी थी। राम-सीता व लक्ष्मण के उस वन में रहने से वहाँ का वातावरण भी शुद्ध  और समृद्ध हो जाता है।

पाठ-7 सोने का हिरन

एक बार रावण की बहन शूर्पणखा राम से आकर्षित हो जाती हैं और उन्हें शादी के लिये कहती हैं जब वह राम  के मना करने पर भी नहीं मानती है और सीताजी को इसका कारण मान कर उनकी तरफ क्रोध में बढ़ती है तो गुस्से में आकर लक्ष्मणजी ने शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। इससे गुस्सा होकर रावण ने राम- लक्ष्मण से बदला लेने के लिये एक साधु का रूप लिया और मारीच ने सोने के हिरण का रूप लिया। जब सीता जी ने हिरण देखा तो उन्होंने उसे लेने के लिये राम को कहा, राम जी ने उनकी बात मानी और हिरण के पीछे चले गए।  मायावी मारीच मरते समय लक्ष्मण लक्ष्मण चीख़ता है, जिससे घबराकर सीता जी लक्ष्मण जी को राम जी की सहायता के लिए भेजती हैं। तभी राम व लक्ष्मण के कुटिया में न होने पर रावण ने साधु के रूप में सीता का अपहरण कर लेता है।

पाठ-8 सीता की खोज

सीता के अपहरण के बाद राम-लक्ष्मण उन्हें ढूढ़ने के लिये वन में भटक रहे थे तभी गरुण पक्षी ने उन्हें बताया कि माता सीता को लंका का राजा रावण वायु मार्ग से ले गया है और इतना कहकर गरुण पक्षी ने अपने प्राण त्याग दिये इससे दोनों भाई बहुत दुखी होते हैं। गरुण राम के लिये पिता समान थे वे उनका अंतिम संस्कार करते हैं। यह जानकारी मिलने के बाद दोनों भाइयों ने सीता की खोज शुरू कर दी।

पाठ-9 राम और सुग्रीव

सीता की खोज करते हुई राम की मुलाकात सुग्रीव से हुई, दोनों लोगों में मित्रता हुई। वहाँ सुग्रीव ने राम जी को बताया कि किस तरह उनके भाई बाली ने उन्हें राज्य से बाहर निकाल दिया और अब सुग्रीव के पास कुछ भी नहीं है, उन्होंने सुग्रीव की मदद की और सुग्रीव तथा उसके भाई बाली के बीच युद्ध में सुग्रीव को विजय बनाया। सुग्रीव के राजा बनने के बाद सुग्रीव की वानर सेना ने भी सीता जी की खोज करनी शुरू कर दी।

पाठ-10 लंका में हनुमान

कई दिनों तक वानर सेना सीता जी की खोज करती रही फिर भी किसी को कहीं भी सीता जी का पता नहीं चला। जटायु के भाई सम्पाती की सलाह पर हनुमान जी माता की खोज करते हुये लंका पहुँचे वहाँ उन्होंने राक्षसी लंकिनी को मारा। आगे बढ़ते हुई उन्हें अशोक वाटिका में एक कोई देवी अशोक के पेड़ के नीचे बैठी दिखाई दी वे समझ गए कि ये देवी सीता ही हैं। उन्होंने सीता जी को राम जी की अंगूठी दी और राम जी का हाल बताया।  लौटते हुए उन्होंने माता की चूड़ामणि ले ली और वह चूड़ामणि हनुमान जी ने लौटकर राम जी को दे दी।

पाठ-11 लंका में विजय

हनुमान जी ने सीताजी का पता लगा लिया, और सारी वानर सेना ने समुद्र के ऊपर पुल बनाया। राम और रावण में युद्ध शुरू हो चुका था। दोनो ही सेनाओं के कई सैनिक मारे जा चुके थे, लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया, कुंभकर्ण भी मर चुका था तभी राम जी ने विभीषण के बताने पर रावण की नाभि में तीर मारा जिससे रावण के नाभि का अमृत सूख गया और रावण की मृत्यु हो गयी। विजय के बाद, विभीषण लंका के नये राजा बने। और राम सीता तथा लक्ष्मण लंका से अयोध्या की ओर चल पड़े।

पाठ-12 राम का राज्याभिषेक

राम ,लक्ष्मण सीता जी के साथ 14 वर्ष बाद अयोध्या वापस लौट आए। नगर के लोगों ने उनका स्वागत घी के दीप जलाकर किया। ऐसा लग रहा था, कि अयोध्या में खुशहाली वापस लौट आयी हो, सभी बहुत खुश थे। सभी लोगों से मिलने के बाद , राज मुनि वशिष्ठ ने राम के राज्याभिषेक का मुहूर्त निकाला। पूरे नगर को इस तरह से सजाया की मानो कोई नई दुल्हन पहली बार ससुराल आई हो, और मुहूर्त के अनुसार श्री राम जी का अयोध्या में राज्याभिषेक हुआ और तीनों लोकों में जय श्री राम की गूँज होने लगी।

दुर्वा 

(पाठ-1 से पाठ-11) व्याकरण

पाठ-1 कलम

ये पाठ “अ, आ, क, ल, म, र, न” से बनने वाले शब्दों का उल्लेख है। छात्रों को इन स्वरों तथा व्यंजनों का उच्चारण एवं शब्द निर्माण सिखाया गया है। पाठ में इन स्वर तथा  व्यंजनों से बनने वाले शब्दों के साथ वाक्य प्रयोग भी सिखाया गया है।

पाठ-2 किताब 

इस पाठ में "इ, ई, ि, ी, ज, ड़, त, ब, व, स" के प्रयोग सिखाये गए हैं।  पाठ इस स्वरों और व्यंजनों ले उच्चारण पे ज़ोर देता है तथा इनके शब्द गठन भी सिखाता है।  वाक्य प्रयोग, तथा मात्राओं की पहचान भी इस पाठ में कराई गयी है।

पाठ-3 घर 

यह पाठ "ऊ, ू, घ, प, य, ह" के शब्दों के गठन को सिखाता है।  इस पाठ में इस व्यंजनों तथा स्वर के उच्चारण और प्रयोग पे भी ज़ोर दिया गया है।  ू  की मात्रा का प्रयोग ये पाठ छात्रों को सिखाता है।  

पाठ-4 पतंग 

इस पाठ में "ओ, ो, ं, ख, च, ड, श" की पहचान, उच्चारण और प्रयोग प ज़ोर दिया गया है।  पाठ छात्रों को इनके शब्दों में प्रयोग सिखाता है तथा इस मात्राओं और स्वर तथा व्यंजनों के प्रयोग से बोलने का स्वर कैसे परिवर्तित होता है इसका भी अभ्यास ये पाठ करवाता है।  

पाठ-5 भालू 

इस पाठ में "उ, ु, ए, े, ँ, ज़, ट, ठ, छ, भ" के शब्दों के निर्माण को सिखाया गया है। इन स्वरों और व्यंजनों के प्रयोग को यह पाठ दर्शाता है और पाठ में वाक्य प्रयोग तथा उच्चारण पे भी विशेष ध्यान दिया गया है।  

पाठ-6 झरना 

पुस्तक का छठवाँ पाठ "ऐ, ै, झ, ढ, ढ़, थ, फ" पर आधारित है।  पाठ में इन स्वर और व्यंजनों का प्रयोग सिखाया गया है।  इनका शब्द निर्माण, उच्चरण और वाक्य प्रयोग पाठ के प्रमुख बिंदु हैं।    

पाठ-7 धनुष 

यह पाठ "औ, ौ, ण, ध, ष" पर आधारित है और छात्रों को मात्राओं के प्रयोग करके शब्द निर्माण सिखाता है। इस पाठ में इन स्वर, व्यंजनों तथा मात्राओं के प्रयोग से बने शब्दों के उच्चारण और वाक्य प्रयोग को सिखाया गया है।    

पाठ-8 रुमाल 

इस पाठ में "ऋ, ृ, रु, रू" का प्रयोग दिखाया और समझाया गया है। यह पाठ छात्रों को "र" पर "ु" की और "ू" की मात्राओं का अंतर समझाता है।  पाठ में "ऋ" और इसकी मात्रा "ृ " का भी प्रयोग सिखाया गया है। शब्द निर्माण में इनके प्रयोग के पश्चात इनके उच्चारण को भी छात्रों को सिखाया गया है।  

पाठ-9 कक्षा 

यह पाठ संयुक्त व्यंजन "क्ष, त्र, ज्ञ, श्र" पर आधारित है।  इन व्यंजनों का प्रयोग इस पाठ में सिखाया गया है और इनसे शब्द निर्माण तथा वाक्य निर्माण भी समझाया गया है।   

पाठ-10 गुब्बारा

इस पाठ में आधे अक्षरों का प्रयोग और उल्लेख है।  पाठ "क्, स्, ्, क्या है, सस्ता, लड्डू" पर आधारित है। आधे अक्षरों के प्रयोग से बने शब्द और उन शब्दों का वाक्य प्रयोग इस पाठ के केंद्र बिंदु हैं।   

पाठ-11 पर्वत 

यह पाठ "र" की विभिन्न मात्राओं पर आधारित है।  इसके आधार बिंदु  "ट्राम, क्रिकेट, पार्वत" हैं। इन् शब्दों में "र" की मात्राओं का विभिन्न रूप से प्रयोग किया गया है ये पाठ इनके प्रयोग से होने वाले उच्चारण में फर्क को दर्शाता है। पाठ में इनसे और भी शब्दों का निर्माण किया गया है।   

पाठ-12 हमारा घर

इस पाठ में राजीव और जोसफ के बीच में बातचीत हो रही है। दोनो बहुत पुराने दोस्त हैं और अचानक मिलते हैं,जोसेफ़ राजीव से पूछता है कि क्या यही तुम्हारा घर है? तब राजीव कहता है हाँ ये मेरा ही घर है, राजीव जोसफ को घर के अंदर ले जाता है और उसे  बताता है कि उसके घर में चार लोग हैं - माँ, पापा बड़े भैया ओर वो। कहानी पूर्ण रूप से घर पर आधारित है और राजीव आगे बताता है कि घर में पांच कमरे हैं, तीन नीचे और दो ऊपर और घर में एक बगीचा भी है।

पाठ -13 कपड़े की दुकान

यह एक परिवार की कहानी है, जिसमे चार लोग होते हैं - माता-पिता ,अनीता और अमर। दीवाली आने वाली होती है और चारो लोग दीवाली के लिये कपड़े खरीदने के लिये बाजार जाने की बात करते है। सभी लोग शाम को कपड़े खरीदने बाज़ार जाते हैं, दुकानदार बच्चों के लिये कपड़े दिखाते हैं। अमर ने अपने लिये पैंट शर्ट और अनिता ने अपने लिये सलवार सूट का कपड़ा खरीदा और दोनों बहुत खुश हुये।

पाठ-14 फूल

इस कविता में फूल की सुंदरता के बारे में बताया है। बगिया में फूल लगे होने से बगिया बहुत सुंदर दिखाई देती  है। जो भी व्यक्ति बाग में जाता है उसे वहाँ बहुत ही अच्छा महसूस होता है। जब हवा चलती है तो फूल इधर उधर हिलते हैं तब ऐसा लगता है जैसे वे बगीचे में आने वाले सभी लोगों का दिल खोल कर स्वागत कर रहे हों। फूल प्रत्येक ऋतु में खुश रहते हैं और हमें भी हर समय खुश रहने का संदेश भी देते हैं।

पाठ-15 बातचीत

पाठ के नाम से ही पता चल रहा है कि ये पाठ दो लोगो के बीच मे हुई बातचीत के बारे में है। वे दो लोग हैं - शोभा और तरुण। दोनो ही कई दिनों बाद एक दूसरे से मिलते हैं, तरुण बताता है कि वो अपने मामा के यहाँ पढ़ता है। खेल के बारे में बात आगे बढ़ती है तो तरुण बताता है कि वो क्रिकेट खेलता है और शोभा बताती है कि वो खो-खो और अन्ताक्षरी खेलती है, जिस पर तरुण कहता है कि अंताक्षरी बुद्धि का खेल है और अब वह भी इसे खेलेगा।

पाठ-16 शिलॉन्ग से फ़ोन

ये कहानी फ़ोन पर हुई वार्ता के बारे में है। रमा के भाई अमरनाथ का शिलांग से फ़ोन आता है। नौकर ननकू फ़ोन रमा को दे देता है। अमरनाथ रमा से  घर के लोगों के बारे में पूछते हैं कि कौन कहाँ है और क्या कर रहा है। रमा बताती है कि आज छुट्टी है और सभी लोग घर पर है, इसके बाद अमरनाथ रमा के पति सुरेश से बात करता है तब तक उनकी बेटी श्यामला भी आ जाती है वो भी अपने मामा से बात करती है और फिर दोनों लोग फ़ोन रख देते हैं।

पाठ-17 तितली

इस कविता को नर्मदाप्रसाद खरे जी ने लिखा है। तितली के रंग-बिरंगे पंख कवि को बहुत पसंद आते हैं, वह तितली से कहते हैं  कि बगीचा तुम्हारे होने से और भी प्यारा लगता है। तुम्हे देखकर हम सबका दिल ललचाता है, तुम कभी भी हमारे पास क्यों नहीं आती हो और फूलों के पास जाकर उनके कानों में क्या कहती हो? तितली तुम हमें बहुत अच्छी लगती हो, एक फूल से दूसरे फूल पर उड़कर जाती हो पर हमसे हमेशा शरमाती हो।

पाठ -18 ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

ईश्वरचन्द्र विद्यासागर बंगाल के निवासी थे। वे बहुत ही होशियार और समाज सुधारक थे। वे सादा जीवन और उच्च विचार में विश्वास करते हैं एक बार उन्होंने एक युवक का सुटकेस स्टेशन से उठाकर बाहर रख दिया क्योंकि उसे कोई कुली नहीं मिल रहा था, उसने उन्हें कुली समझा।  बाद में वही व्यक्ति उनके घर उनसे मिलने आया उस व्यक्ति को बहुत शर्म महसूस हुई और उसे समझ आ गया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

पाठ-19 प्रदर्शनी

इस पाठ में दो लड़कियाँ सलमा व सुजाता प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी के बारे में बातें करते हैं, जिसमे सुजाता मुम्बई से आयी अपनी चचेरी बहन के साथ जाती है। वो सलमा को बताती है कि उसने वहाँ पर क्या क्या देखा और दो बैग भी खरीदे ,इतना सब जानने के बाद सलमा सुजाता से कहती है कि क्या कल तुम और  रंजना मेरे साथ भी प्रदर्शनी देखने चलोगी। सुजाता बताती है की कल तो रविवार है, कल तो बहुत भीड़ होगी हम किसी ओर दिन चलेंगे।

पाठ-20 चिट्ठी

इस कविता में चिट्ठी के बारे में बताया गया है, कि चिठ्ठी में माँ का प्यार भी है, और घर के लिये अखबार भी है। क्योंकि अपने कैसे हैं, ठीक हैं या नहीं यह सब चिट्ठी से ही पता चलता है। चिट्ठी से मन का लगाव भी है। कहने को तो चिट्ठी एक छोटा का कागज का टुकड़ा मात्र होता है, पर उस कागज़ में भी अपनो की बातें होती हैं, जो दुनिया की सैर करके हमारे पास आती हैं।

पाठ-21 अंगुलिमाल

यह कहानी एक डाकू की है जिसका नाम अंगुलिमाल था। वह जंगल मे रहता था लोगो को डराता ओर मारता था उसके डर से लोग जंगल में नहीं जाते थे। लोगो ने यह बात महात्मा बुद्ध को बताई , बुद्ध जंगल में गए वहाँ वे डाकू को देखकर प्रसन्न हुए और कहा कि पेड़ से चार पत्ते लाओ। वह लाया फिर कहा कि इसे पेड़ में ही लगा आओ, डाकू चौक गया इस पर महात्मा ने कहा कि जब तुम इंसान को बना नहीं सकते तो उन्हें मारो भी मत, यह सब सुनकर डाकू उनकी शरण में आ गया।

पाठ-22 यात्रा की तैयारी

इस पाठ में एक परिवार दशहरा में कहीं घूमने की तैयारी कर रहा होता है। पिता जी के पूछने पर निशा मसूरी के लिये कहती है, तो निशांत मना कर देता है। बाद में पिताजी कहते हैं क्यों न इस बार का दशहरा हम कन्याकुमारी में मनायें।  वहाँ पर हम सूर्यास्त व सूर्योदय भी देखेंगे वे निशांत से कहते हैं कि जल्द ही टिकट बुक करा लो और सभी लोगों से कहते हैं कि कम सामान ले चलना क्योकि कम समान मतलब ज्यादा आराम।

पाठ-23 हाथी

एक हाथी जंगल मे बैठा था और वह गाना गाने लगा तभी एक मच्छर उसके कान में चल गया, हाथी जोर जोर से अपने कान हिलाने लगा।  जंगल मे चारो और आवाज़ आने लगी, मानो कोई तबला बज रहा हो।  ऐसा लग रहा कि हाथी मच्छर के गाने में अपनी नई ताल दे रहा हो। पूरा जंगल यह सब देख रहा था, कि एक छोटे से मच्छर के इशारों पर एक विशाल हाथी नाच रहा है। यह कविता बच्चों को खुश करने के लिये लिखी गयी है।

पाठ-24 डॉक्टर

इस पाठ में बातचीत के माध्यम से बताया गया है कि डॉक्टर हमारे जीवन में कितने जरूरी होते हैं। एक माँ का बेटा बीमार होता है, उसे बहुत खाँसी आ रही होती है, ठीक से सो भी नहीं पाता तब वे उसे डॉक्टर को दिखाने के लिये ले जाती हैं।  वहाँ वे डॉक्टर को उसकी बीमारी के बारे में बताती हैं, डॉक्टर बीमारी समझ जाते हैं और उसको दवा दे देते हैं। फिर माँ बेटे दोनो डॉक्टर को शुक्रिया अदा करते हैं ।

पाठ-25 जयपुर से पत्र

इस पाठ में एक पुत्र अमर अपनी स्कूल ट्रिप पर जयपुर जाता है और जयपुर के हवामहल, जंतर-मंतर, आमेर किला तथा देवी माँ के मंदिर की सैर करता है। सैर से लौटने के बाद वह अपने पिता को पत्र लिखता है कि वो जयपुर में अच्छे से पहुँच गया है और उसने जयपुर घूम भी किया है। वह आगे बताता है कि अब वह कल उदयपुर जाएगा और अगला पत्र वहीं से उन्हें भेजेगा।

पाठ-26 बढ़े चलो

इस कविता में कवि कहता है कि हे वीर! धीर तुम आगे बढ़े  चलो ,अपने देश को तिरंगें को अपने हाथों में लेकर उसे लहराते हुए तुम आगे बढ़े चलो। चाहे सामने पर्वत आ जाये या खुद शेर भी खड़ा हो जाये, तुम बिल्कुल डरना नहीं बल्कि निडर होकर आगे बढ़ते जाना। चाहे आसमान में बादल गरज रहे हो या बिजली चमक रही हो हे वीर!तुम घबराना नहीं ओर साहस के साथ बढ़ते जाना ।इसमे कवि सभी को प्रेरणा देता कि उन्हें अपने इरादों को मज़बूत रखना चाहिए।

पाठ-27 व्यर्थ की शंका

किसी गाँव मे एक पति-पत्नी रहते हैं, उनके कोई बच्चा नहीं था इसलिये उन्होंने एक नेवला पाल लिया। वे दोनों उससे बहुत प्यार करते थे, कुछ समय बाद उनके एक बच्चा हुआ,वे बच्चे को नेवले के सहारे घर पर छोड़ जाते हैं। एक बार वे काम से लौटे तो देखा कि नेवले के मुँह में खून लगा है उन्हें लगा कि नेवले ने उनके बच्चे को काट किया, उन्होंने नेवले को मार दिया। जब अंदर उन्होंने जाकर देखा तो बच्चा सही था और पास ही साँप मरा पड़ा था, पति-पत्नी को अपने किये पर पछतावा हुआ। यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी पूरी बात जाने बिना शक नहीं करना चाहिए।

पाठ-28 गधा और सियार

कहानी में गधा और सियार बहुत अच्छे दोस्त थे। एक बार दोनो को बहुत भूख लगी तो वे दोनों रात के अँधेरे में एक खेत में घुस गए और फसल खाने लगे। पेट मे खाना जाते ही गधा बहुत खुश हुआ और गाने लगा। सियार के कई बार मन करने पर भी वह नहीं माना और किसान के हाथों पकड़ा गया और उसकी ख़ूब पिटाई हुई। यह कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि हमें जीवन में हर समय एक जैसा व्यवहार करना चाहिए क्योंकि कभी-कभी ज्यादा उत्साह भी मुश्किल पैदा कर देता है।

 

कक्षा ६ हिंदी पे आकाश द्वारा निर्मित एन.सी.इ.आर.टी (NCERT) हल पे नित्य पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न १: आकाश द्वारा निर्मित हल का भाषा स्तर क्या है?

आकाश संस्थान द्वारा निर्मित एन.सी.इ.आर.टी (NCERT) हल की भाषा बेहद सरल और स्पष्ट रखी गयी है। इस कुंजी (हल) का उद्देश्य है की ये हर छात्र के समझ में आये और सभी पाठक इसका लाभ ले सकें।  

प्रश्न २: आकाश द्वारा निर्मित एन.सी.इ.आर.टी हल की कीमत क्या है?

आकाश द्वारा निर्मित एन.सी.इ.आर.टी हल निशुल्क अर्थात मुफ्त है। इसे छात्र आकाश संस्थान की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।   

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