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NCERT Solutions for Class 10 हिंदी स्पर्श पाठ 1: साखी

iacst-2022

कबीरदास की रचित कविता साखी उनके दोहों का एक छोटा संकलन है। कवि ने इनमें विविध विषयों पर दोहे लिखे हैं और उनके अनल वचनों के अर्थ जीवन की सीख हैं।

कबीर कहते हैं कि हमें ऐसी बातें करनी चाहिए जिससे हमारा अहंम ना झलकता हो। इससे हमारा मन शांत रहेगा तथा सुनने वाले को भी सुख और शान्ति प्राप्त होगी। यहाँ ईश्वर की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कस्तूरी हिरन की नाभि में होती है लेकिन इससे अनजान हिरन उसे पूरे जंगल में ढूंढ़ता फिरता है ठीक उसी प्रकार ईश्वर भी प्रत्येक मनुष्य के हृदय में निवास करते हैं परन्तु मनुष्य उन्हें वहाँ नहीं देख पाता। वह ईश्वर को मंदिर-मस्जिद और तीर्थ स्थानों में ढूंढ़ता रहता है।

यहाँ कबीर कह रहे हैं कि जब तक मनुष्य के मन में अहंकार होता है तब तक उसे ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती ठीक उसी प्रकार जैसे दीपक के जलने पर उसके प्रकाश से अँधियारा मिट जाता है। कबीर के अनुसार ये सारी दुनियां सुखी है क्योंकि ये केवल खाने और सोने का काम करती है इसे किसी भी प्रकार की चिंता नहीं है। उनके अनुसार सबसे दुखी व्यक्ति वो हैं जो प्रभु के वियोग में जागते रहते हैं।

जब किसी मनुष्य के शरीर के अंदर वियोग का साँप बसता है तो उस पर कोई मन्त्र या दवा का असर नहीं होता ठीक उसी प्रकार राम यानी ईश्वर के वियोग में मनुष्य भी जीवित नहीं रहता। संत कबीर कहते हैं कि निंदा करने वाले व्यक्ति को सदा अपने पास रखना चाहिए इससे हमारा स्वभाव साबुन और पानी की मदद के बिना निर्मल हो जाएगा।

कबीर कहते हैं की इस संसार में मोटी-मोटी पुस्तकें पढ़ कर कई मनुष्य मर गए परन्तु कोई भी पंडित ना बन पाया, ईश्वर ही एकमात्र सत्य हैं इसे जानने वाला ही वास्तविक ज्ञानी है ।

कबीर ने मोह-माया रूपी घर को जलाकर ज्ञान प्राप्त कर लिया है अब उनके हाथों में जलती हुई मशाल है यानी ज्ञान है। अब वह उसका घर जलाएंगे जो उनके साथ जाना चाहता है यानी उसे भी मोह-माया के बंधन से आज़ाद होना होगा जो ज्ञान प्राप्त करना चाहता है।

 

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